Imran Khan Death Rumours:
Imran Khan Death Rumours: पाकिस्तान की राजनीतिक गलियारों में आजकल जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में कथित मौत की अफवाहें देश भर में तेजी से फैल रही हैं, जिसने सियासी पारा चढ़ा दिया है। इन अफवाहों के कारण, इमरान खान की पार्टी पीटीआई (PTI) के हजारों समर्थक इस्लामाबाद की अदियाला जेल के बाहर डेरा डाले हुए हैं, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। देश के प्रमुख राजनीतिक खिलाड़ी, पीएमएल-एन (PML-N) के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, ने इस गरमागरम माहौल में एक ऐसा विवादास्पद बयान दिया है, जिसने एक तरह से पूरी पाकिस्तानी जनता या फिर शक्तिशाली सेना को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एक तरफ जहाँ इमरान खान की सलामती को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इमरान खान की तीन बहनों ने यह दावा किया है कि जब वे जेल में बंद अपने भाई से मुलाकात की मांग कर रही थीं, तो पुलिस ने उन पर “क्रूरतापूर्वक हमला” किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल अधिकारियों ने मनमाने ढंग से मुलाकात से इनकार कर दिया और जब उन्होंने विरोध किया तो उनके साथ बदसलूकी की गई। इस घटना ने जेल प्रशासन और सरकार के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे पीटीआई समर्थकों का गुस्सा और भड़क उठा है। इस बीच, सरकार द्वारा इन अफवाहों पर आधिकारिक बयान जारी न करने से संदेह और भी गहराता जा रहा है।
सियासी सरगर्मी को और बढ़ाते हुए, पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ ने बुधवार को एक तीखा हमला बोला। उन्होंने इमरान खान को सत्ता में लाने वालों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, नवनिर्वाचित विधायकों से बात करते हुए नवाज शरीफ ने स्पष्ट रूप से कहा, “इमरान खान एकमात्र अपराधी नहीं था; उसे सत्ता में लाने वाले बड़े अपराधी थे और उन्हें पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।” यह बयान पाकिस्तान के जटिल राजनीतिक-सैन्य संबंधों की ओर इशारा करता है, जहां अक्सर यह आरोप लगता है कि सेना पर्दे के पीछे से अपनी मनपसंद सरकारें बनाती और गिराती है।
नवाज शरीफ के इस बयान से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है: उनके अनुसार, ये “बड़े अपराधी” कौन हैं? क्या यह पाकिस्तानी जनता है, जिसने 2018 के चुनावों में इमरान खान पर भरोसा जताया? या फिर यह पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना है, जिस पर दशकों से देश की राजनीति को नियंत्रित करने का आरोप लगता रहा है?
दरअसल, पाकिस्तान चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 2018 के आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी पीटीआई सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में उभरी थी। पीटीआई ने 270 नेशनल असेंबली सीटों में से 115 सीटों पर जीत हासिल की थी। इन आंकड़ों के आधार पर, यह तर्क दिया जा सकता है कि इमरान खान को प्रधानमंत्री (वजीरे आजम) जनता के वोट से चुना गया था। यदि नवाज शरीफ का इशारा उन लोगों की तरफ है जिन्होंने पीटीआई को वोट दिया, तो यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की जनता को ‘आपराधिक’ ठहराता है। दूसरी तरफ, यदि उनका इशारा सेना की तरफ है, जो मनपसंद नेता को पीएम बनाने का कथित खेल खेलती है, तो यह बयान सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ एक सीधा और गंभीर आरोप है।
गौरतलब है कि 2018 के चुनावों के बाद, संसद के एक सत्र के दौरान, तत्कालीन पीएमएल-एन नेता शहबाज शरीफ (जो अब मौजूदा प्रधानमंत्री हैं) ने भी चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए थे। उन्होंने तब यह आरोप लगाया था कि लगभग 16 लाख वोट खारिज कर दिए गए थे और देश भर में ‘गटरों और सड़कों पर मिले मतपत्रों’ पर भी सवाल उठाया था। ये पुराने आरोप और नवाज शरीफ का नवीनतम बयान, पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर संदेह पैदा करते हैं। मौजूदा संकट और नवाज शरीफ के विस्फोटक बयान ने देश की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है।
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