Imtiaz Jaleel Hijab Controversy:
Imtiaz Jaleel Hijab Controversy: महाराष्ट्र में होने वाले नगर निगम चुनावों के बीच हिजाब और व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने शनिवार को एक जनसभा के दौरान बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को लेकर तीखा बयान देते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी मुस्लिम महिला को गलत नीयत से छूने या उसके सम्मान को ठेस पहुँचाने की कोशिश करेगा, तो वे उसका हाथ काट देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
इम्तियाज जलील का यह गुस्सा हाल ही में घटी दो प्रमुख घटनाओं का परिणाम है। पहली घटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक महिला के चेहरे से हिजाब हटाया था। इस पर विवाद तब और बढ़ गया जब उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था, “नीतीश कुमार ने सिर्फ नकाब ही तो छुआ है, अगर कहीं और छू देते तो क्या होता?” हालांकि निषाद ने बाद में सफाई दी कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया, लेकिन जलील ने इस तरह की मानसिकता को महिलाओं के लिए खतरनाक बताया।
इम्तियाज जलील ने केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि विपक्ष के उन दलों पर भी निशाना साधा जो खुद को धर्मनिरपेक्ष (Secular) कहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पार्टियां गुंडों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं का समर्थन तो खुलेआम करती हैं, लेकिन जब बात मुसलमानों के अधिकारों की आती है, तो वे चुप्पी साध लेती हैं। जलील के अनुसार, तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं और अल्पसंख्यकों के असली मुद्दों पर खड़े होने से कतराते हैं।
इम्तियाज जलील वर्तमान में महाराष्ट्र के जालना में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव के लिए प्रचार कर रहे हैं। जालना में AIMIM ने 17 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। प्रचार के दौरान उन्होंने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नेता और मंत्री संजय शिरसाट के उस बयान का मज़ाक उड़ाया, जिसमें शिरसाट ने मकर संक्रांति का हवाला देकर AIMIM के चुनाव चिन्ह ‘पतंग’ पर रोक लगाने की मांग की थी। जलील ने कहा कि ऐसी मांगें हास्यास्पद हैं और इनका लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।
शिरसाट के बयान का जवाब देते हुए जलील ने तंज कसा कि यदि मकर संक्रांति के कारण पतंग पर रोक लगनी चाहिए, तो फिर शिवसेना और बीजेपी के नेताओं को भी अगले एक महीने तक अपनी कलाई पर ‘घड़ी’ नहीं पहननी चाहिए। यह बयान सीधे तौर पर महायुति गठबंधन की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के चुनाव चिन्ह ‘घड़ी’ की ओर इशारा था। चूंकि इस चुनाव में गठबंधन के दल अलग-अलग ताल ठोक रहे हैं, जलील ने इस आपसी फूट का फायदा उठाते हुए तीखा कटाक्ष किया।
इम्तियाज जलील के इन आक्रामक बयानों को महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हिजाब और सुरक्षा जैसे भावनात्मक मुद्दों को उठाकर AIMIM राज्य के शहरी इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। जलील ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपनी पहचान और अधिकारों के लिए एकजुट होकर वोट करें। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि इन बयानों का चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ता है।
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