Bijapur Student Suicide: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां 9वीं की छात्रा पिंकी कुरसम ने अपने हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना रविवार रात की बताई जा रही है। पिंकी नैमेड़ के आवासीय कन्या विद्यालय पोटा की छात्रा थी और वह चिन्नाकवाली गांव की रहने वाली थी। आत्महत्या की खबर ने परिवार और विद्यालय के साथ-साथ पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, पिंकी ने आश्रम के पंखे की रॉड में अपनी चुन्नी से फंदा बनाकर आत्महत्या की। सहपाठी छात्राओं ने बताया कि पिंकी ने अपने कमरे से दूर जाकर किसी दूसरे कमरे में जाकर यह कदम उठाया था। जब पिंकी कुछ देर तक नहीं मिली, तो छात्राओं ने उसे ढूंढ़ना शुरू किया। एक कमरे में पिंकी को फांसी पर लटका पाया गया, लेकिन चुन्नी फट जाने से वह फर्श पर गिर गई थी। तत्काल उसे जिला अस्पताल बीजापुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पिंकी की मौत की खबर मिलते ही उसके परिजन अस्पताल पहुंचे और उन्होंने आश्रम प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। परिवार वालों ने अस्पताल के सामने धरना प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की। वे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए करीब एक घंटे तक धरने पर बैठे रहे। वहीं, आश्रम की अनुदेशक करिश्मा मंडावी ने बताया कि घटना के बाद छात्राएं डरी-सहमी हैं और अपने कमरे छोड़कर नीचे हॉल में सोने की जिद कर रही हैं। सभी छात्राएं अपने बिस्तर नीचे के कमरे में शिफ्ट कर रही हैं।
बीजापुर एसपी चंद्रकांत गवर्ना ने बताया कि मामले की जांच के लिए मर्ग कायम किया गया है। साथ ही फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच की दिशा तय की जाएगी। पुलिस ने कहा कि वे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पिंकी की आत्महत्या ने बच्चों की मानसिक सेहत और आवासीय विद्यालयों में सुरक्षा की चुनौतियों को फिर से सामने ला दिया है। छात्राओं में भय का माहौल बना हुआ है। यह घटना शिक्षा संस्थानों में बेहतर निगरानी और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल की आवश्यकता को दर्शाती है। मानसिक तनाव, घरेलू समस्याएं या विद्यालय का दबाव कई बार युवाओं को इस कदर प्रभावित कर सकता है।
बीजापुर की यह घटना सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े करती है। बच्चों की सुरक्षा, उनकी मानसिक सेहत और उन्हें समुचित सहारा देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। सरकार और शिक्षा विभाग को मिलकर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। साथ ही परिवार और समाज को भी बच्चों के साथ अधिक संवेदनशीलता और समझदारी से पेश आना चाहिए।
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