IND vs NZ 2nd ODI: भारतीय क्रिकेट टीम बुधवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज का दूसरा वनडे मुकाबला खेलने के लिए राजकोट के मैदान पर उतरेगी। कागजों पर भारतीय टीम बेहद संतुलित और ताकतवर नजर आती है, खासकर घरेलू परिस्थितियों में कीवी टीम को हराना भारत के लिए हमेशा से आसान रहा है। लेकिन, राजकोट का सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम टीम इंडिया के लिए किसी ‘अभिशप्त’ मैदान से कम नहीं रहा है। यहाँ भारतीय टीम का जीत-हार का अनुपात काफी चिंताजनक है। ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो इस पिच पर भारत को अक्सर संघर्ष करना पड़ा है, जो बुधवार को होने वाले मैच के रोमांच को और बढ़ा देता है।
2013 से अब तक: राजकोट में हार का साया और जीत का लंबा इंतजार
राजकोट के इस आधुनिक स्टेडियम में पहला वनडे मुकाबला 11 जनवरी 2013 को भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया था। उस हाई-स्कोरिंग मैच में इंग्लैंड ने भारत को मात्र 9 रनों के करीबी अंतर से मात दी थी। इसके दो साल बाद, 2015 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत को फिर से हार का सामना करना पड़ा, जहाँ मेहमान टीम ने 18 रनों से बाजी मारी। भारतीय टीम को अपनी पहली जीत के लिए सात साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने पहली बार इस मैदान पर 36 रनों से जीत दर्ज की। हालांकि, 2023 में जब ऑस्ट्रेलिया दोबारा यहाँ आई, तो उसने भारत को 66 रनों से हराकर पुराने जख्म ताजा कर दिए।
आंकड़ों का खेल: चार मैचों में केवल एक जीत और टॉस की अहमियत
यदि राजकोट के ट्रैक रिकॉर्ड का गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो भारतीय टीम यहाँ खेले गए 4 मैचों में से 3 हार चुकी है और केवल 1 में उसे सफलता मिली है। एक दिलचस्प तथ्य यह है कि इस मैदान पर अब तक खेले गए सभी वनडे मुकाबलों में उसी टीम ने जीत हासिल की है, जिसने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की है। भारत ने भी साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया को तभी हराया था, जब उसने पहले बैटिंग करते हुए बोर्ड पर बड़ा स्कोर खड़ा किया था। ऐसे में, बुधवार को टॉस की भूमिका ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है, क्योंकि चेज करना यहाँ हमेशा से मुश्किल रहा है।
पहले बल्लेबाजी और 300+ का स्कोर: जीत का एकमात्र मंत्र
राजकोट की पिच को बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग माना जाता है, लेकिन शाम के समय यहाँ लक्ष्य का पीछा करना पेचीदा हो जाता है। अगर कोई भी टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 300 रनों का आंकड़ा पार कर लेती है, तो दूसरी पारी में दबाव के कारण चेज करना लगभग असंभव हो जाता है। भारतीय बल्लेबाजी क्रम फिलहाल शानदार फॉर्म में है। कप्तान रोहित शर्मा और विराट कोहली लगातार रन उगल रहे हैं, वहीं युवा सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल की लय टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी राहत है। मध्यक्रम में भी भारत के पास बड़े शॉट्स खेलने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं, जो पहले बैटिंग मिलने पर बड़ा स्कोर बना सकते हैं।
क्या इतिहास बदलेगी रोहित सेना? न्यूजीलैंड के खिलाफ रणनीतिक तैयारी
न्यूजीलैंड के खिलाफ यह मैच केवल सीरीज के लिहाज से ही नहीं, बल्कि राजकोट में अपने रिकॉर्ड को सुधारने के लिए भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। कीवी टीम के पास बेहतरीन स्विंग गेंदबाज हैं जो शुरुआती ओवरों में भारतीय टॉप ऑर्डर को परेशान कर सकते हैं। हालांकि, भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव और अनुभवी पेस अटैक कीवी बल्लेबाजों पर नकेल कसने के लिए तैयार हैं। अब देखना यह होगा कि क्या टीम इंडिया साल 2020 के इतिहास को दोहराते हुए इस मैदान पर अपनी दूसरी जीत दर्ज कर पाएगी या फिर न्यूजीलैंड यहाँ के खराब रिकॉर्ड का फायदा उठाकर सीरीज में बढ़त बनाएगा।
















