IND vs NZ 3rd ODI
IND vs NZ 3rd ODI: न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने भारतीय सरजमीं पर वह कर दिखाया है जो पिछले साढ़े तीन दशकों में कभी संभव नहीं हो पाया था। इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए सीरीज के तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने मेजबान भारत को 41 रनों से हराकर नया इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ ही कीवी टीम ने तीन मैचों की वनडे सीरीज पर 2-1 से कब्जा जमा लिया है। यह जीत न केवल इस सीरीज की कामयाबी है, बल्कि भारतीय मैदानों पर न्यूजीलैंड के दशकों लंबे संघर्ष और इंतजार का सुखद अंत भी है।
मैच की शुरुआत में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 337 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। कीवी बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली और मैदान के हर कोने में रन बटोरे। डैरेल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स के शानदार शतकों की बदौलत न्यूजीलैंड ने भारत को एक ऐसा लक्ष्य दिया, जिसका पीछा करना इंदौर की छोटी बाउंड्री के बावजूद आसान नहीं था। भारतीय गेंदबाजी आक्रमण इस अहम मुकाबले में फीका नजर आया, जिसका फायदा कीवी बल्लेबाजों ने बखूबी उठाया।
338 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। हालांकि, अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली ने एक छोर संभाले रखा और शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपना एक और वनडे शतक पूरा किया। कोहली के बल्ले से निकले इस सैकड़े ने भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें जगाए रखीं, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी अन्य बल्लेबाज का ठोस साथ नहीं मिल सका। पूरी टीम इंडिया 296 रनों पर सिमट गई। कोहली की शतकीय पारी पर न्यूजीलैंड की अनुशासित गेंदबाजी और चुस्त फील्डिंग भारी पड़ी।
न्यूजीलैंड की यह जीत ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि उन्होंने भारत में पहली बार कोई द्विपक्षीय (Bilateral) वनडे सीरीज जीती है। न्यूजीलैंड की टीम ने पहली बार साल 1988-89 में वनडे सीरीज खेलने के लिए भारत का दौरा किया था। तब से लेकर अब तक कीवी टीम ने कुल 7 बार भारत का दौरा किया, लेकिन हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लगातार 7 सीरीज गंवाने के बाद, अपने 8वें प्रयास में न्यूजीलैंड की टीम भारत को उसके घर में हराने में सफल रही है। यह कीवी क्रिकेट के इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज होने वाली उपलब्धि है।
इंदौर की यह जीत न्यूजीलैंड के लिए एक बड़े मानसिक अवरोध को तोड़ने जैसी है। पिछले 37 वर्षों से भारत में सीरीज जीतने की उनकी हर कोशिश नाकाम रही थी, लेकिन इस बार युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलित मिश्रण ने असंभव को संभव कर दिखाया। टॉम लैथम की कप्तानी में इस टीम ने भारतीय परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाया और निर्णायक क्षणों में धैर्य बनाए रखा। जहां भारतीय टीम अपनी गलतियों से सबक नहीं ले पाई, वहीं न्यूजीलैंड ने खेल के हर विभाग में अपना दबदबा साबित किया और ऐतिहासिक ट्रॉफी अपने नाम की।
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