Ind vs NZ ODI Series
Ind vs NZ ODI Series 2026: भारतीय क्रिकेट फैंस अभी नवंबर 2024 में टेस्ट सीरीज के दौरान न्यूज़ीलैंड के हाथों हुए 3-0 के ‘क्लीन स्वीप’ के सदमे से बाहर भी नहीं निकल पाए थे कि रविवार को इंदौर वनडे में मिली 41 रनों की हार ने उन जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर दिया है। न्यूज़ीलैंड ने भारत को उसी की सरज़मीं पर वनडे सीरीज में 2-1 से मात देकर इतिहास रच दिया है। पिछले 52 सालों के द्विपक्षीय इतिहास में यह पहला मौका है जब कीवी टीम भारतीय धरती पर वनडे सीरीज जीतने में सफल रही है। 1975 विश्व कप से शुरू हुए इन दोनों देशों के बीच के वनडे सफर में न्यूज़ीलैंड कभी भी भारत को उसके घर में नहीं हरा सका था, लेकिन पिछले 18 महीनों में कीवियों ने टीम इंडिया को ऐसे घाव दिए हैं जो ताउम्र सालते रहेंगे।
जब साल 2024 में न्यूज़ीलैंड ने टेस्ट सीरीज में भारत का सफाया किया था, तब प्रशंसकों और जानकारों ने यह कहकर गौतम गंभीर का बचाव किया था कि वह टीम के साथ नए-नए जुड़े हैं। जुलाई 2024 में पदभार संभालने के मात्र तीन महीने बाद ही गंभीर को उस बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। तब तर्क दिया गया था कि उन्हें अपनी कार्यशैली लागू करने के लिए समय चाहिए। लेकिन अब करीब डेढ़ साल बीत चुके हैं, और गंभीर कुर्सी के अभ्यस्त हो चुके हैं। इसके बावजूद, अपने दिग्गज खिलाड़ियों के बिना आई न्यूज़ीलैंड की टीम ने भारत को उसी के घर में धूल चटा दी।
गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारत ने पिछले साल मार्च में दुबई में न्यूज़ीलैंड को हराकर चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जरूर जीता। लेकिन उस जीत पर कप्तान रोहित शर्मा का एक बयान काफी चर्चा में रहा था। रोहित ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि टीम की जीत के पीछे पूर्व कोच रवि शास्त्री द्वारा तैयार किया गया ‘वर्क कल्चर’ और उनके द्वारा सेट किए गए कामकाजी मानक थे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या चैंपियंस ट्रॉफी की वह बड़ी जीत गंभीर की रणनीति का हिस्सा थी या पिछले सिस्टम की विरासत? अब घर में मिली इस अपमानजनक हार के बाद उंगलियां सीधे हेड कोच की कार्यक्षमता पर उठ रही हैं।
गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे शक्तिशाली और महंगे कोचों में से एक माने जाते हैं। बीसीसीआई (BCCI) ने संविधान के दायरे से बाहर जाकर उन्हें वे तमाम शक्तियाँ प्रदान कीं जो शायद ही किसी पिछले कोच को मिली हों। उन्होंने अपना मनपसंद कोचिंग स्टाफ चुना, पसंदीदा खिलाड़ियों को टीम में जगह दी और घरेलू क्रिकेट में बड़े सितारों की भागीदारी अनिवार्य करने जैसे सख्त प्रोटोकॉल लागू किए। लेकिन इन सबके बावजूद परिणाम वही ‘ढाक के तीन पात’ रहे। केन विलियमसन और मिचेल सेंटनर जैसे दिग्गज मैच-विजेताओं के बिना आई कीवी टीम ने जिस आसानी से भारत को 2-1 से हराया, वह गंभीर की कोचिंग और टीम चयन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
इंदौर में मिली हार ने भारतीय क्रिकेट के खोखलेपन को उजागर कर दिया है। भारतीय पिचों पर स्पिन और गति के सामने टॉप ऑर्डर का घुटने टेक देना एक पुरानी बीमारी बनती जा रही है। 2027 विश्व कप अब बहुत दूर नहीं है, और यदि न्यूज़ीलैंड जैसी ‘कमजोर’ मानी जा रही टीम (बिना मुख्य सितारों के) भारत को घर में रौंद सकती है, तो विश्व कप की राह कांटों भरी होगी। बीसीसीआई और हेड कोच को अब इस सवाल का जवाब देना ही होगा कि इस ऐतिहासिक शर्मिंदगी का असली जिम्मेदार कौन है? क्रिकेट प्रेमी अब केवल बहानों से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।
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