Independence Day 2025 : देश आज 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और पूरे भारत में देशभक्ति की भावना चरम पर है। सभी की निगाहें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक लाल किले पर टिकी थीं, जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 12वीं बार देश को संबोधित किया।
इस बार प्रधानमंत्री के संबोधन की थीम “नया भारत, सुरक्षित भारत, आत्मनिर्भर भारत” पर केंद्रित रही, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सर्जिकल जवाब, और जल अधिकार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और आक्रामक रुख दिखाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सीमा पार आतंकी ठिकानों को तबाह करने वाले वीर जवानों को सैल्यूट किया। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए नरसंहार ने पूरे देश को हिला दिया था। उन्होंने इस ऑपरेशन को आत्मनिर्भर भारत की सैन्य क्षमता का प्रमाण बताया और कहा कि भारत ने यह दिखा दिया है कि अब वह सख्त फैसले लेने में पीछे नहीं हटेगा।
“हमने सेना को छूट दी थी, समय और स्थान का चुनाव उन्हें सौंपा। सेना ने वह कर दिखाया जो कई सालों से नहीं हो पाया था,” – पीएम मोदी
पीएम मोदी ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि को एकतरफा और अन्यायपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से भारत की नदियों का पानी दुश्मन देशों के खेतों को सींच रहा है, जबकि देश के किसान प्यासे रहे हैं। “हिन्दुस्तान के हक का पानी सिर्फ हिन्दुस्तान के किसानों का है। अब भारत और यह अन्याय सहन नहीं करेगा।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और सामरिक ताकत का भी हिस्सा है। उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ रक्षा उपकरणों की सराहना करते हुए कहा कि यदि भारत आत्मनिर्भर न होता, तो ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशन संभव नहीं होते। “आत्मनिर्भर भारत अब एक विकल्प नहीं, एक अनिवार्यता है।”
पीएम मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि धारा 370 हटाकर देश ने उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी है। साथ ही उन्होंने आज़ादी के लिए बलिदान देने वाले लाखों स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया और देशवासियों से संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रति समर्पित रहने की अपील की।
लाल किले से पीएम मोदी ने कहा कि उनके सामने आज लघु भारत बैठा है – जिसमें देश के किसान, ग्राम प्रधान, खिलाड़ी, अग्निवीर और आम नागरिक शामिल हैं। उन्होंने डिजिटल माध्यम से जुड़े भारतवासियों और विदेशों में बसे भारतीयों को भी संबोधित कर एकता का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी का यह 12वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन केवल भाषण नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र गौरव का घोषणापत्र था। उनकी स्पष्ट चेतावनी – “खून और पानी अब एक साथ नहीं बहेंगे” – ने दिखा दिया कि आज का भारत अब चुप नहीं बैठेगा, बल्कि अपने हक के लिए खड़ा होगा।
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