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INDIA alliance meeting : सोनिया गांधी की अगुवाई में INDIA गठबंधन की पहली बैठक

INDIA alliance meeting : संसद के मानसून सत्र और बिहार विधानसभा चुनाव से पहले INDIA गठबंधन की पहली वर्चुअल बैठक आज शनिवार को आयोजित हो रही है, जिसकी अगुवाई कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी कर रही हैं। इस बैठक को गठबंधन की पुनर्स्थापना की दिशा में पहला संगठित प्रयास माना जा रहा है, जिसमें लोकसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक स्थिति का आकलन भी शामिल होगा।

टीएमसी की पहली औपचारिक भागीदारी

बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पार्टी की ओर से महासचिव अभिषेक बनर्जी इसमें हिस्सा लेंगे। यह टीएमसी की INDIA गठबंधन में चुनावों के बाद पहली औपचारिक भागीदारी होगी, जिसे विपक्षी एकजुटता की ओर एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

‘आप’ को आमंत्रण नहीं, कांग्रेस का सख्त रुख

बैठक में आम आदमी पार्टी (AAP) को आमंत्रित नहीं किया गया है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि AAP अब विपक्ष नहीं बल्कि भाजपा की ‘बी टीम’ की तरह व्यवहार कर रही है और सरकार से ‘समझौता करती’ दिख रही है। यह कदम INDIA गठबंधन में भरोसे और विचारधारा की स्पष्टता को प्राथमिकता देने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

18 दलों के प्रमुख नेता लेंगे भाग

करीब 18 विपक्षी दलों के नेता इस वर्चुअल बैठक में भाग लेंगे, जिनमें समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और डीएमके के एमके स्टालिन जैसे नेता शामिल हो सकते हैं। बैठक में संसद के मानसून सत्र की संयुक्त रणनीति, मोदी सरकार के खिलाफ विरोध की धार को मजबूत करने और राजनीतिक मुद्दों पर एकमत बनाने की दिशा में चर्चा होगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी समीक्षा भी एजेंडे में

सूत्रों के मुताबिक बैठक में पहलगाम, ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिकी दबाव में संभावित सीजफायर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा तय मानी जा रही है। साथ ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और बंगाल में चुनाव बाद की संभावित कार्रवाई पर भी विचार होगा। TMC अब कांग्रेस के रुख के साथ खड़ी नजर आ रही है, जिससे गठबंधन को बंगाल में भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

गठबंधन को पुनर्जीवित करने की कवायद तेज

यह बैठक INDIA गठबंधन द्वारा आगामी राज्य चुनावों और संसद सत्र में एकजुट होकर रणनीतिक हमला करने की तैयारी के तौर पर देखी जा रही है। विपक्षी दल इस पहल के ज़रिए राजनीतिक सक्रियता को फिर से स्थापित करने और गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। यह संकेत भी स्पष्ट है कि गठबंधन अब सिर्फ चुनावी मंच नहीं बल्कि एक स्थायी राजनीतिक ताकत के रूप में उभरना चाहता है।

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