India Bangladesh Relations
India Bangladesh Relations: भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते कड़वाहट भरे संबंधों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। नई दिल्ली में तैनात बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रेयाज़ हमीदुल्ला सोमवार, 29 दिसंबर की रात को अचानक ढाका के लिए रवाना हो गए। बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘प्रोथोम अलो’ के अनुसार, उन्हें विदेश मंत्रालय द्वारा ‘अर्जेंट’ आधार पर मुख्यालय बुलाया गया है। सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा तनावपूर्ण द्विपक्षीय स्थितियों पर चर्चा करने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस आने का निर्देश दिया गया था। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों पड़ोसियों के बीच विश्वास की कमी साफ नजर आ रही है।
बांग्लादेश में वर्तमान में एक बड़े बदलाव का दौर चल रहा है। शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद देश में कट्टरपंथी ताकतें तेजी से सक्रिय हुई हैं। आने वाले फरवरी माह में वहां आम चुनाव प्रस्तावित हैं, लेकिन उससे पहले ही हिंसा और अशांति का माहौल बना हुआ है। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बनी अंतरिम सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता के इस संक्रमण काल में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा मिला है, जिससे न केवल बांग्लादेश का सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हुआ है, बल्कि भारत के साथ उसके पुराने और मजबूत संबंधों पर भी असर पड़ा है।
पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। हाल ही में ‘दीपू दास’ नाम के एक हिंदू युवक की बर्बर मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) की घटना ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया। भारत सरकार ने इस मुद्दे पर लगातार आधिकारिक रूप से अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। हालाँकि, ढाका की प्रतिक्रिया सकारात्मक रहने के बजाय कूटनीतिक तकरार की ओर झुक गई है। बांग्लादेशी प्रशासन अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय भारत से लगातार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जिससे रिश्तों में सुधार की गुंजाइश कम होती दिख रही है।
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश का इस्लामी चरमपंथ की ओर झुकाव केवल दक्षिण एशिया के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है। इटालियन लेखक और विशेषज्ञ सर्जियो रेस्टेली ने ‘टाइम्स ऑफ इज़राइल’ में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बांग्लादेश में बढ़ते उग्रवाद को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसकी आंच यूरोपीय देशों तक पहुँच सकती है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने लंबे समय तक बांग्लादेश के चरमपंथ को एक क्षेत्रीय समस्या मानकर अनदेखा किया, लेकिन अब यह भ्रम टूट रहा है।
सर्जियो रेस्टेली के अनुसार, नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के ‘अंतरिम’ शासन के तहत बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों को एक नई जमीन मिल रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि इस्लामी चरमपंथ को समय रहते नहीं रोका गया, तो दुनिया भर में यहूदी समुदायों और इजरायल को निशाना बनाया जा सकता है। विशेषज्ञ इसे वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि भारत और बांग्लादेश के संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाने के लिए ढाका को कड़े प्रशासनिक फैसले लेने होंगे और अल्पसंख्यकों के बीच सुरक्षा का भाव पैदा करना होगा।
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