India Bangladesh Relations: भारत और बांग्लादेश के संबंध सिर्फ भौगोलिक सीमाओं, ऐतिहासिक विरासत या कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच संबंध साझा आकांक्षाओं, विकास की उम्मीदों और बेहतर भविष्य के सपनों से भी जुड़े हैं। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मंगलवार को ढाका में आयोजित एक व्यापारिक स्वागत समारोह में दोनों देशों के रिश्तों को लेकर यह बात कही। यह कार्यक्रम भारतीय उद्योग परिसंघ यानी CII के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए आयोजित किया गया था।
दो जीवंत लोकतंत्रों की साझा आकांक्षाओं पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए त्रिवेदी ने भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश जीवंत लोकतंत्र हैं और उनके रिश्तों को केवल इतिहास या भूगोल के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों देशों में बड़ी संख्या में युवा हैं, जिनमें प्रतिभा और आगे बढ़ने की क्षमता मौजूद है। ऐसे में भारत और बांग्लादेश सिर्फ सीमाएं ही नहीं साझा करते, बल्कि सपने, उम्मीदें और आकांक्षाएं भी एक जैसी हैं।
युवाओं की प्रतिभा को बताया रिश्तों की बड़ी ताकत
दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों की युवा आबादी भविष्य के रिश्तों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। युवाओं के पास नई सोच, तकनीकी क्षमता और विकास को आगे बढ़ाने की ऊर्जा है। इसलिए भारत और बांग्लादेश के बीच सहयोग को केवल पारंपरिक कूटनीति तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, व्यापार, निवेश और रोजगार जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री मोदी की पड़ोसी प्रथम नीति का जिक्र
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ यानी पड़ोसी प्रथम नीति का उल्लेख करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि भारत सरकार अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को विशेष महत्व देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए कहा कि पड़ोस भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके मुताबिक, बांग्लादेश में उनकी भूमिका दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और बेहतर संवाद कायम करने से जुड़ी है।
शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधे संवाद की बात
अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सीधे संपर्क की बात भी कही। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह उनसे सीधे संवाद कर सकते हैं। उनके मुताबिक, बांग्लादेश के प्रति भारत का सम्मान, स्नेह और मजबूत संबंधों की इच्छा ही इस तरह के उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व के पीछे महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद को लगातार बनाए रखने पर जोर दिया।
मतभेदों के बावजूद रिश्ते मजबूत रखने की अपील
भारत और बांग्लादेश के बीच समय-समय पर राजनीतिक या अन्य मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। इस पर त्रिवेदी ने कहा कि पड़ोसी देशों के बीच असहमति होना असामान्य नहीं है। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों की तुलना परिवार से करते हुए कहा कि छोटी-मोटी असहमति रिश्तों को खत्म करने का कारण नहीं बननी चाहिए। साझा इतिहास और संस्कृति दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब रखती है।
व्यापार और निवेश बढ़ाने पर प्रतिनिधिमंडल का फोकस
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से CII का 18 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी कर रहे हैं। दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की नई संभावनाओं पर चर्चा करेगा। इस पहल से द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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