India-Canada Security Pact: भारत और कनाडा ने अपने कड़वाहट भरे कूटनीतिक संबंधों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम उठाया है। शनिवार, 7 फरवरी को कनाडा की राजधानी ओटावा में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नताली ड्रौइन के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय वार्ता में दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से निपटने के लिए एक व्यापक सहयोग योजना पर सहमति जताई है। इस बैठक को द्विपक्षीय सुरक्षा संवाद के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करना है।
रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने के आसार: निज्जर विवाद के बाद पहला बड़ा संवाद
साल 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर था। हालांकि, एनएसए डोभाल की यह हालिया ओटावा यात्रा संकेत दे रही है कि दोनों पक्ष अब पुरानी बातों को पीछे छोड़कर संबंधों को पटरी पर लाने के लिए गंभीर हैं। यह दौरा इसलिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा प्रस्तावित है। डोभाल और ड्रौइन की यह मुलाकात उस संभावित यात्रा के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रही है।
संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति: ड्रग्स और क्राइम नेटवर्क पर कसेगा शिकंजा
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों देशों ने कानून प्रवर्तन से जुड़े मुद्दों के त्वरित समाधान के लिए ‘संपर्क अधिकारियों’ (Liaison Officers) की नियुक्ति करने का फैसला किया है। यह एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे भारत और कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान रियल-टाइम में संभव हो सकेगा। इस तंत्र के सक्रिय होने से नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी, हवाला कारोबार और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करना काफी आसान हो जाएगा। दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां अब कामकाजी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करेंगी।
साइबर सुरक्षा और आव्रजन प्रवर्तन: भविष्य की चुनौतियों पर साझा रणनीति
बैठक के दौरान केवल परंपरागत सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आधुनिक चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच साइबर सिक्योरिटी को लेकर सहयोग बढ़ाने पर विशेष सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के दायरे में रहते हुए धोखाधड़ी (Fraud) और आव्रजन प्रवर्तन (Immigration Enforcement) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत जारी रखने का निर्णय लिया गया है। भारत और कनाडा दोनों ही आव्रजन से जुड़े फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक-दूसरे के साथ डेटा और कानूनी सहयोग साझा करने को तैयार हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
विकसित भारत और वैश्विक सुरक्षा: सुरक्षा संवाद का व्यापक प्रभाव
विदेश मंत्रालय ने इस बैठक को ‘द्विपक्षीय सुरक्षा बातचीत’ का एक सफल हिस्सा बताया है। अधिकारियों का मानना है कि इस साझा प्लान से न केवल द्विपक्षीय विवाद सुलझेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर सुरक्षा मानकों में भी सुधार होगा। दोनों देशों ने अपने-अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए शुरू की गई पहलों में हुई प्रगति को स्वीकार किया। यह समझौता दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और अपराध नियंत्रण की आती है, तो कूटनीति के द्वार हमेशा खुले रहते हैं। आने वाले समय में डोभाल की यह यात्रा भारत-कनाडा संबंधों को एक नई गरिमा और स्थिरता प्रदान कर सकती है।
















