अपराध

India Crime Statistics : निर्भया केस के बाद भी नहीं थमी दरिंदगी, 2022 में 4.45 लाख से ज्यादा केस दर्ज, यूपी सबसे ऊपर

India Crime Statistics : हर सुबह डराती हैं अखबार की सुर्खियां आज के समय में जब भी आप सुबह अखबार उठाते हैं, टीवी पर समाचार देखते हैं या मोबाइल में खबरें पढ़ते हैं, तो महिलाओं के खिलाफ अपराध की खबरें आम हो गई हैं। कभी रेप की खबर, कभी यौन उत्पीड़न तो कभी दहेज के लिए हत्या—ये घटनाएं हर दिन सामने आती हैं। इसके अलावा, घरेलू हिंसा की घटनाएं हमारे आस-पास में घटती दिखाई देती हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में निरंतर इजाफा हो रहा है।

निर्भया के बाद भी नहीं थमी हिंसा

2012 का निर्भया केस एक ऐसा मोड़ था जब पूरे देश ने महिला सुरक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाई। उम्मीद थी कि अब कोई निर्भया दोबारा न होगी। लेकिन अफसोस, इसके बाद भी महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। हाल ही में कोलकाता मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने फिर वही दर्द ताजा कर दिया।

संसद में उठे सवाल, सरकार ने पेश किए आंकड़े

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि:
  • क्या पिछले पांच वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में वृद्धि हुई है?
  • क्या बलात्कार, दहेज हत्या, घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न इसके प्रमुख कारण हैं?
  • क्या कमजोर कानूनी प्रक्रिया इसकी वजह है?
  • सरकार इन अपराधों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है?

सरकार ने 2018 से 2022 तक के आंकड़े पेश किए

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने इन सवालों के जवाब में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े संसद में रखे। इन आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पांच वर्षों में लगातार बढ़ोतरी हुई है:

साल केस की संख्या
2018 3,78,236
2019 4,05,861
2020 3,71,503
2021 4,28,278
2022 4,45,256

महिलाएं अभी भी सड़कों पर सुरक्षित नहीं

2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121.1 करोड़ थी, जिसमें 48.5% महिलाएं थीं। इन महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है, लेकिन आज भी वे रात को सड़कों पर सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर

2022 के आंकड़ों के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। देश के 10 ऐसे राज्य जहां सबसे ज्यादा मामले सामने आए:

राज्य 2022 में दर्ज केस
उत्तर प्रदेश 65,743
महाराष्ट्र 45,331
राजस्थान 45,058
पश्चिम बंगाल 34,738
मध्य प्रदेश 32,765
आंध्र प्रदेश 25,503
ओडिशा 23,648
तेलंगाना 22,066
कर्नाटक 17,813
हरियाणा 16,743

उत्तर प्रदेश: लगातार पांच साल टॉप पर

पांच वर्षों के आंकड़े दिखाते हैं कि उत्तर प्रदेश में लगातार महिलाओं के खिलाफ अपराध सबसे अधिक रहे।

साल केस दर्ज
2018 59,445
2019 59,853
2020 49,385
2021 56,083
2022 65,743

बिहार: अपराध में हर साल बढ़ोतरी

बिहार में भी समय के साथ महिला अपराध के मामलों में इजाफा हुआ है।

साल केस दर्ज
2018 16,920
2019 18,587
2020 15,359
2021 17,950
2022 20,222

महाराष्ट्र: शहरी राज्य, लेकिन अपराध ऊंचाई पर

महाराष्ट्र देश के सबसे विकसित राज्यों में से एक है, फिर भी महिला अपराधों में यह टॉप 3 में बना रहा।

साल केस दर्ज
2018 35,497
2019 37,144
2020 31,954
2021 39,526
2022 45,331

आंध्र प्रदेश और केरल में भी उछाल

आंध्र प्रदेश में 2022 में अचानक अपराधों की संख्या बढ़ी:
साल केस दर्ज
2018 16,438
2019 17,746
2020 17,089
2021 17,752
2022 25,503

केरल:

साल केस दर्ज
2018 10,461
2019 11,462
2020 10,139
2021 13,539
2022 15,213

सबसे ज्यादा केस पति या रिश्तेदारों की क्रूरता

जब अपराध की श्रेणियों की बात आती है, तो सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा यानी पति या रिश्तेदारों की क्रूरता के होते हैं।
अपराध 2018 2019 2020 2021 2022
पति या रिश्तेदारों की क्रूरता 1,03,272 1,24,934 1,11,549 1,36,234 1,40,019
अपहरण / किडनैपिंग 72,709 72,681 62,300 75,369 85,310
छेड़छाड़/यौन हमले 89,097 88,259 85,392 89,200 83,344
रेप 33,356 32,032 28,046 31,677 31,516

सरकार ने उठाए कुछ महत्वपूर्ण कदम

सरकार की ओर से दिए गए जवाबों में यह बताया गया कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई कानूनी और नीतिगत सुधार किए गए हैं:

  1. नए कानून लागू: 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू हुए। महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों को अब BNS अध्याय-5 में समाहित किया गया है।
  2. गवाह सुरक्षा और डिजिटल सबूत: BNSS की धारा 398 गवाह सुरक्षा योजना को लागू करती है। वहीं BSA की धारा 2(1)(d) के तहत डिजिटल रिकॉर्ड्स जैसे ईमेल, मैसेज कानूनी सबूत माने जाएंगे।
  3. कार्यस्थल पर सुरक्षा: Occupational Safety Code 2020 के तहत कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। SHe-Box पोर्टल के जरिए यौन उत्पीड़न की शिकायत ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है।
  4. निर्भया फंड के तहत कदम: वन स्टॉप सेंटर (OSC) के जरिए हिंसा पीड़ित महिलाओं को मेडिकल, कानूनी, काउंसलिंग और पुलिस सहायता एक ही छत के नीचे मिलती है। अभी लंबी लड़ाई बाकी है ये आंकड़े देश के लिए एक चेतावनी हैं कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारों में न रह जाए। महिलाएं आज भी अपने ही घरों में असुरक्षित हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की इज्जत या बच्चों की खातिर चुपचाप अत्याचार सहती रहती हैं। यह जरूरी है कि न केवल कानून सख्त हों, बल्कि सामाजिक चेतना भी बढ़े ताकि महिलाएं बिना डर के जी सकें।

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