India-EU Trade Deal
India-EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच रिश्तों का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लिएन ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक ‘ऐतिहासिक व्यापार समझौते’ (FTA) के बेहद करीब पहुँच चुके हैं। इस समझौते को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है, जो करीब 200 करोड़ लोगों के विशाल बाजार को एक सूत्र में पिरोएगा।
उर्सुला वॉन ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। उन्होंने बताया कि यह समझौता वैश्विक जीडीपी (GDP) के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगा। उर्सुला के अनुसार, यद्यपि कुछ तकनीकी काम अभी शेष हैं, लेकिन दोनों पक्ष आधिकारिक घोषणा के मुहाने पर खड़े हैं। यह डील न केवल भारत के लिए यूरोप के द्वार खोलेगी, बल्कि यूरोपीय कंपनियों को भी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजार में पहले कदम का लाभ (First-mover advantage) प्रदान करेगी।
यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगे। ये दोनों नेता इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली शिखर वार्ता में न केवल एफटीए (FTA) बल्कि ‘रणनीतिक एजेंडा 2026-2030’ पर भी मुहर लगने की संभावना है। यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ के बीच 2004 से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
इस शिखर सम्मेलन में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि रक्षा बुनियादी ढांचे (Defense Infrastructure) पर भी एक महत्वपूर्ण समझौता होने की उम्मीद है। प्रस्तावित सुरक्षा और रक्षा साझेदारी (SDP) के तहत भारतीय कंपनियों को यूरोपीय संघ के ‘सुरक्षा कार्रवाई’ (SAFE) कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिलेगा। उर्सुला वॉन ने रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलती जियोपॉलिटिक्स का जिक्र करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल तकनीकी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत जैसे विश्वसनीय साथी के साथ रक्षा सहयोग अनिवार्य है।
यूरोपीय संघ के साथ यह संभावित डील अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़े कूटनीतिक झटके के रूप में देखी जा रही है। ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है और भारत-अमेरिका ट्रेड डील अभी भी अधर में लटकी हुई है। ऐसे समय में जब ट्रंप प्रशासन भारत पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, यूरोपीय संघ के साथ यह व्यापारिक समझौता भारत के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक व्यापार में अपनी निर्भरता को संतुलित करने में सफल रहा है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच एफटीए पर बातचीत का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पहली बार 2007 में शुरू हुई वार्ता को 2013 में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। हालांकि, जून 2022 में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से इसे फिर से बहाल किया गया। अब व्यापार, निवेश, रक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे जटिल मुद्दों पर आम सहमति बन चुकी है। अगले सप्ताह होने वाली घोषणा न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में भारत की स्थिति को और अधिक सशक्त करेगी।
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