India FDI surge
India FDI surge: संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की नवीनतम रिपोर्ट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के बढ़ते प्रभुत्व पर मुहर लगा दी है। साल 2025 की इस रिपोर्ट के अनुसार, जहां दुनिया के अधिकांश विकासशील देश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं भारत ने निवेश के प्रवाह में 73% की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है। वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों के एफडीआई में 2% की गिरावट आई है, इसके बावजूद भारत का कुल निवेश 47 बिलियन डॉलर के आंकड़े को छू गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारत अब वैश्विक निवेशकों के लिए चीन का सबसे सशक्त विकल्प बनकर उभरा है।
भारत में आए इस भारी निवेश के पीछे मुख्य रूप से दो क्षेत्रों का बड़ा हाथ रहा है—सेवा क्षेत्र (Services) और विनिर्माण (Manufacturing)। आईटी (IT), फाइनेंस और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) जैसे सर्विस सेक्टर में विदेशी कंपनियों ने रिकॉर्ड निवेश किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की डिजिटल क्रांति और कुशल श्रम शक्ति ने निवेशकों को आकर्षित किया है। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बड़े सुधार देखे गए हैं। भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में इसकी स्थिति मजबूत हुई है।
यूएनसीटीएडी की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत सरकार की रणनीतिक नीतियों ने विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतने में अहम भूमिका निभाई है। ‘मेक इन इंडिया’ और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत को एकीकृत करने के उद्देश्यों ने बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को प्रेरित किया है। निवेशकों के लिए भारत एक सुरक्षित और स्थिर ठिकाना साबित हो रहा है। इसके विपरीत, चीन जैसे देशों में अनिश्चितता और विनियामक दबाव के कारण निवेश लगातार तीसरे साल भी गिरावट की ओर अग्रसर है, जिसका सीधा लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।
अगर वैश्विक स्तर पर बात करें, तो एफडीआई का कुल प्रवाह 14% बढ़कर लगभग 1.6 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। हालांकि, यह वृद्धि विकसित देशों में अधिक केंद्रित रही है, जहां निवेश 43% बढ़कर 728 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यूरोपीय संघ में जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे देशों ने 56% की दर से प्रगति की। वहीं, विकासशील देशों के लिए स्थिति उतनी सुखद नहीं रही, जहां कुल निवेश में 2% की गिरावट दर्ज की गई। इस वैश्विक गिरावट के विपरीत भारत का 73% की दर से बढ़ना इसे दुनिया के बाकी देशों से बहुत आगे खड़ा कर देता है।
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू एशिया के बड़े आर्थिक केंद्रों में निवेश की कमी है। चीन, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में विदेशी निवेश में उल्लेखनीय गिरावट आई है। विशेष रूप से चीन में एफडीआई प्रवाह 8% गिरकर 107.5 बिलियन डॉलर रह गया है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब चीन के प्रति निवेशकों का उत्साह कम हुआ है। दूसरी ओर, अमेरिका में निवेश 2% की वृद्धि के साथ स्थिर बना हुआ है। ब्राजील (42%) और मैक्सिको (16%) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन भारत की विकास दर के सामने ये सभी देश पीछे छूट गए हैं।
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