Hypersonic Missile
Hypersonic Missile : बदलते वैश्विक परिवेश और युद्ध के आधुनिक तौर-तरीकों को देखते हुए भारत अपनी सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख समीर वी. कामत ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने बताया कि भारत बहुत जल्द अत्याधुनिक ‘हाइपरसोनिक’ मिसाइल तकनीक से लैस होने जा रहा है। देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए डीआरडीओ ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल’ (HGV) और ‘हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ (HCM) पर तेजी से काम कर रहा है। यह तकनीक भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी जिनके पास अजेय हथियार मौजूद हैं।
इन नई हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खूबी इनकी अविश्वसनीय रफ्तार और मारक क्षमता है। वर्तमान में भारत के पास ब्रह्मोस जैसी ‘सुपरसोनिक’ मिसाइल है, लेकिन भविष्य की यह हाइपरसोनिक मिसाइलें ब्रह्मोस की तुलना में दोगुनी रफ्तार से हमला करने में सक्षम होंगी। डीआरडीओ प्रमुख के अनुसार, इनकी गति ध्वनि की गति से कम से कम पांच गुना अधिक (मैक 5+) होगी। अपनी तीव्र गति और हवा में मार्ग बदलने की क्षमता के कारण, दुनिया का कोई भी वर्तमान मिसाइल डिफेंस सिस्टम इन्हें रोकने में सक्षम नहीं होगा। ग्लाइड मिसाइल का पहला परीक्षण जल्द ही होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती ‘स्क्रैमजेट’ इंजन की होती है, और इस मोर्चे पर भारत को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। हाल ही में स्क्रैमजेट प्रोपल्शन का 1,000 सेकंड से अधिक समय तक सफल परीक्षण किया गया है, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। डीआरडीओ का लक्ष्य है कि सरकार से औपचारिक मंजूरी मिलने के महज 5 साल के भीतर इस मिसाइल प्रणाली को भारतीय सेना के बेड़े में शामिल कर लिया जाए। इसके अलावा, भारत एक अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइल पर भी काम कर रहा है, जिसका तीसरा चरण परीक्षण इसी महीने होना निर्धारित है।
वर्तमान में हाइपरसोनिक हथियारों की दौड़ में रूस और चीन सबसे आगे माने जाते हैं। रूस के पास ‘जिरकॉन’ और ‘किंजल’ जैसी घातक मिसाइलें हैं, जबकि चीन ‘डीएफ-जेडएफ’ को पहले ही तैनात कर चुका है। आश्चर्यजनक रूप से, इस तकनीक में अमेरिका थोड़ा पीछे नजर आ रहा है। अमेरिका के हालिया हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स, जैसे एजीएम-183, उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं रहे हैं। ऐसे में भारत का अपनी स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करना रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अग्नि सीरीज की मिसाइलों ने पहले ही भारत की धाक जमा रखी है, लेकिन अब ‘अग्नि-6’ के रूप में भारत एक महाशक्ति बनने की राह पर है। डीआरडीओ प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि उनकी टीम अग्नि-6 कार्यक्रम के लिए तकनीकी रूप से पूरी तरह तैयार है और केवल सरकार की हरी झंडी का इंतजार है। यह एक ‘इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल’ (ICBM) होगी, जिसकी मारक क्षमता 10,000 से 12,000 किलोमीटर तक होने का अनुमान है।
अग्नि-6 मिसाइल की सबसे खतरनाक विशेषता इसकी एमआईआरवी (MIRV) तकनीक होगी। इसका मतलब है कि यह मिसाइल एक ही समय में कई परमाणु हथियार (Warheads) ले जा सकेगी और अलग-अलग दिशाओं में स्थित कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बना सकेगी। यह क्षमता दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह भ्रमित कर देगी। अग्नि-6 के आने के बाद भारत की पहुंच दुनिया के लगभग हर कोने तक हो जाएगी, जो देश की संप्रभुता के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होगा।
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