India-Nepal Border
India-Nepal Border : भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों और खुली सीमा के बीच अब सुरक्षा और राजस्व को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जहां एक ओर नेपाल सरकार ने सीमा पार से आने वाले सामान पर कड़े कस्टम नियम लागू कर दिए हैं, वहीं भारत सरकार ने सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति पर पैनी नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। इन नए बदलावों का सीधा असर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों और दोनों देशों के बीच व्यापार करने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिकों और स्थानीय लोगों के लिए अब सीमा पार खरीदारी करना महंगा साबित हो रहा है। नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने सीमा पर चौकसी बढ़ाते हुए कस्टम डयूटी वसूलना शुरू कर दिया है। अब यदि कोई व्यक्ति 100 नेपाली रुपये (लगभग 62 भारतीय रुपये) से अधिक मूल्य का कोई भी सामान भारत से नेपाल ले जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से सीमा शुल्क देना होगा। नेपाल सरकार ने इसके लिए 659 पन्नों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जिसमें खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर विलासिता के सामानों तक पर लगने वाले टैक्स का पूरा विवरण दिया गया है। इस कदम से सीमावर्ती बाजारों के छोटे व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।
सुरक्षा के मोर्चे पर भारत सरकार ने भी एक बड़ा कदम उठाया है। भारत-नेपाल सीमा के जरिए होने वाली अवांछित गतिविधियों और संदिग्धों की आवाजाही पर लगाम लगाने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) शुरू किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से सीमा पार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का चेहरा स्कैन किया जाएगा और उनका एक डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। फिलहाल इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित सोनौली बॉर्डर से शुरू किया गया है। सोनौली दोनों देशों के बीच आवाजाही का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है, इसलिए तकनीक के परीक्षण के लिए इसे सबसे पहले चुना गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आने-जाने वाले लोगों की पूरी हिस्ट्री सुरक्षित रखना है। जब भी कोई व्यक्ति सड़क मार्ग से सीमा पार करेगा, सिस्टम उसकी फोटो खींचकर डेटाबेस में सुरक्षित कर लेगा। अगली बार जब वही व्यक्ति दोबारा सीमा पर आएगा, तो सुरक्षा एजेंसियों के पास उसकी पिछली यात्राओं का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इससे न केवल आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और तस्करी जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
वर्तमान स्थितियों की समीक्षा करें तो पता चलता है कि भारत से नेपाल जाने वाले लोगों को कड़ी जांच और टैक्स के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके विपरीत, नेपाल से भारत आने वाले लोगों के लिए प्रक्रिया अब भी सरल बनी हुई है। भारतीय सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) पहले की तरह ही मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रही है। वहां लोगों की सामान्य तलाशी और पहचान पत्र की जांच की जा रही है, जिससे आवाजाही में कोई बड़ा व्यवधान पैदा नहीं हो रहा है। फेस रिकग्निशन सिस्टम को भी इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह डेटा तो एकत्र करेगा, लेकिन लोगों को कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सोनौली बॉर्डर पर इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, भारत सरकार इसे नेपाल से सटे अन्य सभी 21 प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर लागू करने की योजना बना रही है। इस तकनीक के आने से भविष्य में किसी भी आपराधिक तत्व के लिए पहचान छिपाकर सीमा पार करना नामुमकिन हो जाएगा। हालांकि, स्थानीय निवासियों की मांग है कि सुरक्षा के साथ-साथ उनके दैनिक जीवन की जरूरतों और छोटे व्यापार का भी ध्यान रखा जाए, क्योंकि दोनों देशों के सीमावर्ती गांवों की अर्थव्यवस्था एक-दूसरे पर काफी हद तक निर्भर है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह डिजिटल निगरानी भारत-नेपाल संबंधों को सुरक्षा के नए स्तर पर कैसे ले जाती है।
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