India Pakistan News
India Pakistan News: भारत और पाकिस्तान के बीच मई महीने में हुए तनाव को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के बाद अब चीन ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का दावा किया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार (30 दिसंबर) को सार्वजनिक रूप से कहा कि चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव को कम करने के लिए सक्रिय रूप से मध्यस्थता की थी। चीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बार-बार स्पष्ट कर चुकी है कि द्विपक्षीय मसलों में किसी भी तीसरे पक्ष का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय स्थिति और चीन के विदेश संबंध’ कार्यक्रम में वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया भर में संघर्षों और अस्थिरता में तीव्र वृद्धि देखी गई है। वांग ने जोर देकर कहा कि इस साल स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्षों की आवृत्ति पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक रही है। उन्होंने भू-राजनीतिक उथल-पुथल को चिंताजनक बताते हुए चीन की भूमिका को एक शांतिदूत के रूप में पेश करने की कोशिश की।
पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, वांग यी ने दावा किया कि चीन ने अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों के समाधान में हमेशा एक न्यायसंगत और निष्पक्ष रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि चीन केवल लक्षणों पर नहीं, बल्कि विवादों के मूल कारणों को सुलझाने पर ध्यान देता है। अपने संबोधन में उन्होंने कई देशों का उदाहरण दिया जहाँ चीन ने कथित तौर पर मध्यस्थता की थी। वांग ने कहा कि उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, फिलिस्तीन-इजरायल और कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष के साथ-साथ पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव को कम करने में भी चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
चीनी विदेश मंत्री का यह बयान 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में आया है। मई में चार दिनों तक चले इस सैन्य संघर्ष के बाद जब युद्ध विराम हुआ, तब भी मध्यस्थता की खबरें उठी थीं। हालांकि, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने 13 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी बाहरी शक्ति ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया है। भारत का कहना है कि यह युद्ध विराम दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संवाद (Direct Military Dialogue) के माध्यम से संभव हुआ था।
चीन के मध्यस्थता के दावों पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि वह पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के कुल सैन्य उपकरणों का 81 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले चीन से आता है। ऐसे में भारत का मानना है कि जो देश एक पक्ष को सैन्य रूप से मजबूत कर रहा हो, वह निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हो सकता। नई दिल्ली ने कई बार दोहराया है कि शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत भारत-पाकिस्तान के सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी तीसरे देश या संस्था की कोई गुंजाइश नहीं है।
वांग यी का यह बयान भारत की संप्रभुता और स्वतंत्र कूटनीति के लिए एक चुनौती की तरह देखा जा रहा है। जहाँ एक ओर चीन खुद को शांति का दूत दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने हमेशा की तरह तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। आने वाले दिनों में विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना है, जो दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।
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