India and Pakistan
India and Pakistan: अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक ‘काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’ (CFR) ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘कॉन्फ्लिक्ट्स टू वॉच इन 2026’ में दुनिया को एक बड़ी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर पूर्ण युद्ध होने की प्रबल संभावना है। CFR का मानना है कि कश्मीर घाटी में बढ़ती आतंकी गतिविधियां और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों को सीधे सैन्य टकराव की ओर धकेल सकती हैं। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि यह संघर्ष भड़कता है, तो इसका सीधा और गहरा असर अमेरिकी रणनीतिक हितों और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।
भले ही पिछले कुछ समय में जम्मू-कश्मीर में कोई बहुत बड़ा हमला न हुआ हो, लेकिन खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट बेहद चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्दी में जम्मू क्षेत्र के कठिन इलाकों में 30 से अधिक पाकिस्तानी प्रशिक्षित आतंकी सक्रिय हैं, जो किसी भी समय बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। इसी बीच, भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपनी सैन्य तैयारियों को तेज कर दिया है। भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में 79,000 करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है, जिसमें अत्याधुनिक ड्रोन और मिसाइलें शामिल हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान भी तुर्किये और चीन से नए एयर डिफेंस सिस्टम और घातक ड्रोन खरीदने के लिए बातचीत कर रहा है, ताकि अपनी सैन्य कमजोरियों को छिपा सके।
CFR की रिपोर्ट केवल भारत-पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। इसमें संकेत दिया गया है कि 2026 में पाकिस्तान और तालिबान शासित अफगानिस्तान के बीच भी बड़े पैमाने पर सशस्त्र संघर्ष हो सकता है। 2600 किलोमीटर लंबी ‘डूरंड लाइन’ पर पहले ही भीषण झड़पें हो चुकी हैं, जिनमें दोनों देशों की सेनाओं ने एक-दूसरे की चौकियों को तबाह करने का दावा किया है। डूरंड लाइन पर बढ़ता विवाद और सीमा पार से होने वाली गोलीबारी ने पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा को भी अशांत कर दिया है, जिससे दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य और भी जटिल हो गया है।
यह रिपोर्ट अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञों के गहन सर्वेक्षण पर आधारित है, जिसका मुख्य उद्देश्य वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को भविष्य के संभावित युद्ध क्षेत्रों के बारे में सतर्क करना है। CFR ने दुनिया भर के संघर्षों को तीन श्रेणियों (टियर-1, टियर-2 और टियर-3) में विभाजित किया है। भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले संभावित युद्ध को इसके गंभीर प्रभाव के कारण उच्च श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया आने वाले वर्षों में वैश्विक तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है, जहाँ अमेरिका को कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।
रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के अलावा चार अन्य बड़े खतरों का भी जिक्र किया गया है:
रूस-यूक्रेन युद्ध: 2026 में इस युद्ध के और अधिक हिंसक होने की आशंका है, जिससे यूरोप की पूरी सुरक्षा संरचना चरमरा सकती है।
गाजा और वेस्ट बैंक: इजराइल और फिलिस्तीन के बीच बढ़ती हिंसा पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकती है, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा होगा।
चीन-ताइवान तनाव: ताइवान पर चीन का सैन्य दबाव 2026 में चरम पर हो सकता है, जो अमेरिका को सीधे तौर पर युद्ध में खींच सकता है।
ईरान-इजराइल टकराव: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इजराइल के साथ उसका सीधा युद्ध छिड़ने की आशंका है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और शांति के लिए बड़ा खतरा होगा।
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