UN Warning: मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने भारत का कड़ा और स्पष्ट रुख विश्व पटल पर रखा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत ने वैश्विक मंच से यह संदेश दिया है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता और क्षेत्र में हिंसा का विस्तार न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति के लिए खतरा है।

28 फरवरी से जारी हिंसा पर भारत की गहरी चिंता
पर्वतनेनी हरीश ने वैश्विक मंच पर याद दिलाया कि 28 फरवरी 2026 को जब इस क्षेत्र में पहली बार सैन्य संघर्ष की शुरुआत हुई थी, भारत ने उसी समय अपनी गंभीर चिंता व्यक्त कर दी थी। भारत का मानना है कि इस युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय देशों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक मानवीय संकट को भी जन्म दिया है। भारत ने शुरू से ही सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए। भारत का स्पष्ट मानना है कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का सबसे बुरा प्रभाव निर्दोष आम नागरिकों पर पड़ता है, जिनकी सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
बातचीत और कूटनीति ही शांति का एकमात्र रास्ता
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दोहराया कि सैन्य शक्ति के प्रयोग से कभी भी स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती। हरीश ने कहा कि भारत का रुख हमेशा से ‘संवाद और कूटनीति’ (Dialogue and Diplomacy) का रहा है। उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया कि वे आपसी मतभेदों और कड़वाहट को सुलझाने के लिए मेज पर आएं और शांतिपूर्ण समाधान तलाशें। भारत ने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियादी शर्त है, जिसका उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
व्यापारिक जहाजों पर हमले और भारतीय नाविकों की शहादत पर दुख
इस संबोधन का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह था जब हरीश ने समुद्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों का जिक्र किया। उन्होंने अत्यंत दुख के साथ बताया कि इन हमलों में जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन करार दिया। भारत का तर्क है कि व्यापारिक जहाजों को युद्ध का हिस्सा बनाना अनैतिक और अवैध है। ये जहाज केवल माल ढोने का साधन नहीं हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं, जिन पर निर्दोष लोग काम करते हैं। इन हमलों से न केवल मानवीय हानि हो रही है, बल्कि दुनिया भर में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन भी बाधित हो रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक व्यापार के लिए ‘रेड लाइन’
भारत ने खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखी। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण गलियारा माना जाता है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही में किसी भी प्रकार की रुकावट या बाधा डालना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। भारत ने मांग की है कि इस समुद्री क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित की जानी चाहिए। यदि यहां व्यापार बाधित होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया में महंगाई और ऊर्जा संकट के रूप में देखने को मिलेगा, जिसे भारत स्वीकार नहीं करेगा।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की पुरजोर अपील
अपने संबोधन के अंत में पर्वतनेनी हरीश ने सभी संबंधित देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और वैश्विक संधियों का सम्मान करने की अपील की। भारत ने वैश्विक समुदाय का आह्वान किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापार सुरक्षित ढंग से चलता रहे। भारत का संदेश साफ है: क्षेत्र में शांति केवल तभी संभव है जब सभी पक्ष आक्रामकता का त्याग कर अंतरराष्ट्रीय गरिमा और सीमाओं का सम्मान करें। भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में इस दिशा में हर संभव कूटनीतिक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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