Indian Rupee
Indian Rupee: भारत और अमेरिका के बीच नए व्यापार समझौते की खबर ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में उत्साह की लहर दौड़ दी है। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला है। मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 119 पैसे की जोरदार बढ़त के साथ 90.30 के स्तर पर पहुँच गया। विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ में कटौती की घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारत की साख को मजबूती दी है। इस उछाल ने न केवल रुपये की स्थिति सुधारी है, बल्कि भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बड़े पैमाने पर वापसी के संकेत भी दिए हैं।
इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपये की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही। यह पिछले कारोबारी सत्र के बंद स्तर 91.49 के मुकाबले काफी मजबूत होकर खुला। इस तेजी के पीछे वैश्विक कारकों का भी हाथ रहा; छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को दर्शाने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ 0.20 प्रतिशत गिरकर 97.43 पर आ गया। इसके साथ ही, वैश्विक तेल मानक ‘ब्रेंट क्रूड’ वायदा में भी 0.41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 66.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए रुपये को और मजबूती प्रदान करने वाली साबित हो रही है।
व्यापार समझौते का सकारात्मक असर केवल मुद्रा बाजार तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि घरेलू शेयर बाजार में भी आज ‘दिवाली’ जैसा माहौल दिखा। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 3656.74 अंकों (4.48%) की विशाल बढ़त के साथ 85,323.20 के ऐतिहासिक स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स भी पीछे नहीं रहा और उसने 1219.65 अंकों (4.86%) की बंपर उछाल के साथ 26,308.05 पर कारोबार की शुरुआत की। निवेशकों ने ट्रंप-मोदी वार्ता के नतीजों का खुले दिल से स्वागत किया है, जिससे बाजार की कुल संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफोनिक वार्ता के बाद भारत के साथ एक महत्वपूर्ण ‘ट्रेड डील’ का ऐलान किया। इस समझौते के तहत, भारतीय सामानों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापारिक कड़वाहट को कम करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि अभी केवल बुनियादी टैरिफ में कटौती की गई है, जबकि रूसी तेल आयात से जुड़े अन्य प्रतिबंधात्मक शुल्क अभी भी चर्चा के दायरे में हैं।
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका भारत पर लगे अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी हटाने के लिए तैयार है, जो रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया था। चूंकि भारत ने पहले ही रूस से तेल की खरीद में कमी की है, इसलिए अमेरिका ने लचीला रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। हालांकि, इसके लिए एक कड़ी शर्त रखी गई है—भारत को रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद करना होगा। यदि भारत इस शर्त को स्वीकार कर लेता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे और भी सुगमता से खुल जाएंगे, जिससे रुपये और अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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