India-USA BTA: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA को लेकर भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत ऐसी किसी भी व्यापारिक डील को मंजूरी नहीं देगा, जिसमें भारतीय कारोबारियों को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर शर्तें नहीं मिलती हैं। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका को भारत के लिए तरजीही व्यापार दरों की पेशकश करनी होगी, तभी समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर दरों पर जोर
नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौतों यानी FTA को लेकर आयोजित एक कार्यशाला में पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को तभी अंतिम रूप दिया जाएगा, जब अमेरिकी पक्ष भारत के प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर दर देने में सक्षम होगा। इसके बाद ही BTA के अंतिम प्रावधानों को मंजूरी दी जाएगी और समझौते से जुड़े विस्तृत विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे। भारत का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिससे उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सके।
भारतीय कंपनियों के हितों की सुरक्षा अहम
वाणिज्य मंत्री के बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार व्यापार समझौते में भारतीय कंपनियों के हितों को प्राथमिकता देना चाहती है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके निर्यातकों को ऐसी परिस्थितियां मिलें, जिससे वे अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के कारोबारियों के मुकाबले कमजोर स्थिति में न रहें। खास तौर पर टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर भारत समान या बेहतर प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों की मांग कर रहा है।
मनमाने टैरिफ के दबाव में नहीं आएगा भारत
गोयल के रुख से यह भी स्पष्ट है कि भारत किसी एकतरफा या मनमाने टैरिफ दबाव के तहत व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के पक्ष में नहीं है। सरकार का लक्ष्य ऐसी डील तैयार करना है, जिससे भारतीय कारोबारियों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ें और उन्हें वैश्विक बाजार में बराबरी का मुकाबला करने का मौका मिले। भारत चाहता है कि समझौता दोनों देशों के लिए संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी हो।
FTA से निर्यात के नए अवसर मिलने का दावा
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने जिन मुक्त व्यापार समझौतों को अब तक अंतिम रूप दिया है, उनसे देश के घरेलू कारोबारियों और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। सरकार आगे भी इसी रणनीति के तहत विभिन्न देशों और व्यापारिक समूहों के साथ समझौतों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इन व्यापार समझौतों का उद्देश्य भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खोलना और वैश्विक व्यापार में देश की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
अमेरिका के साथ समझौते में टैरिफ बड़ा मुद्दा
भारत-अमेरिका BTA को लेकर टैरिफ और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। भारत की कोशिश है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं के लिए अधिक स्थिर और अनुकूल व्यापारिक परिस्थितियां उपलब्ध हों। सरकार का मानना है कि किसी भी समझौते में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से भारत अंतिम डील से पहले दूसरे देशों को मिलने वाली व्यापारिक दरों का भी ध्यान रख रहा है।
कई देशों के साथ व्यापार समझौते की तैयारी
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि भारत आने वाले समय में कई अन्य देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाएगा। इनमें कनाडा, मेक्सिको, चिली, मर्कोसुर, SACU, GCC और इजराइल शामिल हैं। मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का प्रमुख क्षेत्रीय आर्थिक एवं व्यापारिक संगठन है, जबकि SACU दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ है। GCC में पश्चिम एशिया के छह देश शामिल हैं।
वैश्विक बाजार में भारत की पहुंच बढ़ाने की कोशिश
भारत की व्यापक व्यापार रणनीति का उद्देश्य अलग-अलग देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करना और भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशना है। सरकार ऐसे व्यापार समझौतों पर जोर दे रही है, जिनसे भारतीय उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। अमेरिका के साथ BTA को लेकर पीयूष गोयल का ताजा बयान इसी नीति को दर्शाता है कि भारत किसी भी समझौते में अपने कारोबारियों के हितों से समझौता नहीं करेगा।
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