Indian Army policy : भारत अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है, जिसके तहत देश आतंकी हमलों और अन्य खतरों के खिलाफ अधिक आक्रामक तरीके से प्रतिक्रिया देगा। भारतीय सेना के नए युद्ध सिद्धांत के अनुसार, आतंकी हमले अब देश के खिलाफ युद्ध माने जाएंगे, और इसके खिलाफ सैन्यबल पहले से तैयार रहेगा। यह नया सिद्धांत सीमापार से प्रायोजित आतंकवाद और हाल ही में किए गए ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
नए युद्ध सिद्धांत में ‘सामरिक संयम’ की जगह अब ‘प्रोएक्टिव डेटेरेंस’, ‘प्रिएम्टिव स्ट्राइक्स’ और ‘प्रिवेंटिव कार्रवाई’ को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका मतलब है कि सेना दुश्मन को पहले ही डराकर रोकने, खतरा पैदा होते ही हमला करने और भविष्य के खतरों से पहले ही निपटने के लिए तैयार रहेगी। सैन्य मामलों के विभाग ने इस सिद्धांत पर काम करना शुरू कर दिया है, और इसे सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) की निगरानी में अंतिम रूप दिया जाएगा।
नई सैन्य नीति को लागू करने के लिए भारतीय सेना ने एक “फ्यूचर वॉरफेयर एनालिसिस ग्रुप” का गठन किया है। यह समूह युद्ध के विभिन्न तरीकों का अध्ययन करेगा और इसके आधार पर नई सैन्य रणनीतियों, प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण और ऑपरेशनल प्लानिंग को तैयार करेगा। इस ग्रुप की सिफारिशों पर ही सेना के भविष्य के कार्य योजना और रणनीतियों का निर्धारण होगा।
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने शांगरीला डायलॉग में बताया कि वैश्विक सैन्य रणनीतियों में बदलाव के कारण भारत की नई युद्ध नीति की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध में प्रमुख बदलाव आ चुके हैं, जैसे कि वेपन सिस्टम्स का सुपर और हाइपर सोनिक होना, स्टेल्थ टेक्नोलॉजी का उपयोग, और एआई तथा मशीन लर्निंग से निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि। इसके साथ ही, जमीन, हवा और समुद्र में सेंसर तकनीकी का परिपक्व होना, जिससे युद्धक्षेत्र में हर जानकारी पारदर्शी हो जाती है, इस बदलाव को भी ध्यान में रखा गया है।
भारतीय सेना अब टेक्नोलॉजी संचालित युद्ध पर अधिक ध्यान देगी। इसमें आमने-सामने की लड़ाई की संभावना कम होगी, और हमले के लिए मिसाइलें जैसे स्कैल्प, हैमर और ब्रह्मोस, साथ ही डिफेंस के लिए ड्रोन जैसे आकाश और स्काई स्ट्राइकर का इस्तेमाल किया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव के आधार पर सेना ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है, और अब दुश्मन को यह अनुमान नहीं हो पाएगा कि किस उकसावे पर कितना जवाब दिया जाएगा।
नई युद्ध नीति में मीडिया वारफेयर को भी एक अहम स्थान दिया जाएगा। जनमत को अपने पक्ष में रखने के लिए दुष्प्रचार का तत्काल उत्तर देना और सही सूचना से सही नैरेटिव बनाना जरूरी होगा। इस रणनीति के तहत, सेना न केवल युद्ध मैदान में बल्कि सूचना के क्षेत्र में भी सक्रिय रहेगी। युद्ध के दौरान मीडिया का सही तरीके से इस्तेमाल युद्ध की दिशा और जनसंचार को प्रभावित कर सकता है।
भारत का यह नया युद्ध सिद्धांत मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए आक्रामकता और तैयार रहने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगा।
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