Tech Report
Tech Report: भारतीय स्मार्टफोन बाजार, जो पिछले कई वर्षों से लगातार विकास की राह पर था, अब छह साल में पहली बार सुस्त नजर आ रहा है। काउंटरप्वाइंट रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट में पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कोविड-19 महामारी के दौर के बाद यह पहला मौका है जब भारत में मोबाइल फोन की मांग और आपूर्ति के बीच ऐसा असंतुलन देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर चिपसेट की कमी (Chip Shortage) और पुर्जों की लागत बढ़ने के कारण हैंडसेट की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई है, उसने ग्राहकों के उत्साह को कम कर दिया है।
इस तिमाही के सबसे चौंकाने वाले आंकड़ों में चीनी ब्रांड वीवो (Vivo) का प्रदर्शन रहा है। वीवो अब 21 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ भारतीय स्मार्टफोन बाजार का नया सुल्तान बन गया है। कंपनी ने दिग्गज दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग और लंबे समय तक शीर्ष पर रही शाओमी (Xiaomi) को काफी पीछे छोड़ दिया है। आक्रामक मार्केटिंग और बजट से लेकर मिड-रेंज सेगमेंट में बेहतरीन कैमरा फोन पेश करने की रणनीति वीवो के लिए कारगर साबित हुई है।
सैमसंग (Samsung) 17.4 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर अपनी पकड़ बनाए हुए है। हालांकि पिछली तिमाही (17.6%) के मुकाबले इसमें मामूली गिरावट आई है, लेकिन प्रीमियम सेगमेंट और 5G फोन की श्रेणी में सैमसंग अभी भी मजबूत है। वहीं, एक समय भारतीय बाजार पर राज करने वाली शाओमी और पोको का संयुक्त प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। शाओमी 7.9 प्रतिशत शेयर के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई है। ब्रांड्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की बदलती पसंद ने पुराने दिग्गजों के लिए चुनौती पेश कर दी है।
जहाँ बड़े ब्रांड्स संघर्ष कर रहे हैं, वहीं ‘नथिंग’ (Nothing) ने अपने अनोखे डिजाइन और पारदर्शी लुक के दम पर सबको हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नथिंग ने पिछली तिमाही में 47 प्रतिशत की अभूतपूर्व सालाना ग्रोथ दर्ज की है, जो किसी भी नए ब्रांड के लिए बड़ी उपलब्धि है। दूसरी ओर, प्रीमियम सेगमेंट (₹45,000 से ऊपर) में गूगल (Google Pixel) सबसे तेजी से बढ़ने वाला ब्रांड बनकर उभरा है। भारतीय यूजर्स अब प्रीमियम अनुभव के लिए एप्पल और सैमसंग के अलावा गूगल के पिक्सल सीरीज पर भी भरोसा जता रहे हैं।
अन्य ब्रांड्स की बात करें तो ओप्पो (Oppo) के लिए यह तिमाही अच्छी रही है। इसका मार्केट शेयर 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 13.6 प्रतिशत हो गया है। इसके विपरीत, रियलमी (Realme) को तगड़ा झटका लगा है। रियलमी का मार्केट शेयर पिछली तिमाही के 11 प्रतिशत से घटकर अब महज 8.9 प्रतिशत रह गया है। वहीं, वनप्लस (OnePlus) की हिस्सेदारी भी 2.4 प्रतिशत से गिरकर 1.8 प्रतिशत पर आ गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय ग्राहक अब ब्रांड लॉयल्टी से ज्यादा वैल्यू-फॉर-मनी और इनोवेशन को तवज्जो दे रहे हैं।
स्मार्टफोन मार्केट में आई यह सुस्ती अस्थायी हो सकती है, लेकिन इसने कंपनियों को अपनी कीमतों और इन्वेंट्री मैनेजमेंट पर दोबारा सोचने को मजबूर कर दिया है। आने वाले महीनों में 5G नेटवर्क के विस्तार और त्योहारी सीजन की आहट के साथ बाजार में दोबारा तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल, वीवो का नेतृत्व और नथिंग जैसी कंपनियों की आक्रामक ग्रोथ ने भारतीय स्मार्टफोन इंडस्ट्री की ‘केमिस्ट्री’ को पूरी तरह बदल दिया है। अब देखना होगा कि सैमसंग और शाओमी अपनी खोई हुई बादशाहत वापस पाने के लिए क्या नई चाल चलते हैं।
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