राजनीति

Indigo Flight Crisis: मोनोपॉली मॉडल की कीमत आम भारतीय चुका रहा है: राहुल गांधी का बड़ा हमला

Indigo Flight Crisis: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo) वर्तमान में अपने सबसे गंभीर परिचालन संकट (Operational Crisis) से गुज़र रही है। गुरुवार को, एयरलाइन को 550 से अधिक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जिससे पूरे देश में हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई। लगातार तीन दिनों से जारी इस अभूतपूर्व रद्दीकरण के कारण हजारों यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा है। विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) के अनुसार, इंडिगो की रोज़ाना लगभग 170-200 उड़ानें रद्द हो रही हैं, जो सामान्य संख्या से कहीं अधिक है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एयरलाइन ने 8 दिसंबर से अपनी उड़ानों की संख्या में कटौती करने का फैसला किया है।

Indigo Flight Crisis: प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर रद्दीकरण

गुरुवार को हुई अव्यवस्था का असर देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। 550 से अधिक उड़ानों के रद्दीकरण में दिल्ली हवाई अड्डे पर सर्वाधिक 172 उड़ानें शामिल थीं। इसके अलावा, सूत्रों के अनुसार अन्य प्रमुख शहरों का हाल भी बुरा था:

  • मुंबई एयरपोर्ट: लगभग 118 उड़ानें रद्द।

  • बेंगलुरु एयरपोर्ट: लगभग 100 उड़ानें रद्द।

  • हैदराबाद: 75 उड़ानें रद्द।

  • कोलकाता: 35 उड़ानें रद्द।

  • चेन्नई और गोवा: क्रमशः 26 और 11 उड़ानें रद्द।

इस व्यापक अव्यवस्था ने पूरे देश में हवाई यात्रा करने वाले हज़ारों यात्रियों के यात्रा कार्यक्रमों को बाधित किया, जिससे उन्हें देरी, कनेक्शन छूटने और अंतिम क्षण में यात्रा योजनाओं को बदलने की मजबूरी झेलनी पड़ी।

Indigo Flight Crisis: राहुल गांधी का सरकार पर हमला: “मैच-फिक्सिंग मोनोपॉली” का परिणाम

इस परिचालन संकट को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंडिगो की विफलता के लिए सीधे तौर पर सरकार के “मोनोपॉली मॉडल” को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा:“इंडिगो की नाकामी इस सरकार के मोनोपॉली मॉडल की कीमत है। एक बार फिर, आम भारतीय ही इसकी कीमत चुका रहे हैं – देरी, कैंसलेशन और लाचारी के रूप में। भारत हर सेक्टर में सही कॉम्पिटिशन का हकदार है, मैच-फिक्सिंग मोनोपॉली का नहीं।”

राहुल गांधी के इस बयान ने इस संकट को केवल एक परिचालन समस्या के बजाय एक व्यापक नीतिगत मुद्दे के रूप में उजागर किया है, जिसमें उन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की कमी पर जोर दिया है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने लिया कड़ा रुख, इंडिगो मैनेजमेंट पर जताई नाराज़गी

इंडिगो की लगातार उड़ानों के रद्द होने के मामले को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने इस स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सिविल एविएशन सेक्रेटरी, डीजीसीए, बीसीएएस, एएआई और मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

मीटिंग के दौरान, मंत्री ने इंडिगो के वरिष्ठ मैनेजमेंट के समक्ष अपनी नाराज़गी व्यक्त की और स्थिति को संभालने के तरीके पर निराशा जाहिर की। उन्होंने जोर देकर कहा कि एयरलाइन के पास बदले हुए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को आसानी से अपनाने के लिए पर्याप्त समय था, जिसका उद्देश्य बेहतर थकान प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मंत्री ने इंडिगो को तत्काल परिचालन सामान्य करने और यह सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया कि इस मौजूदा संकट की वजह से हवाई किराए में कोई भी अनुचित बढ़ोतरी न हो।

इंडिगो की सफाई और यात्रियों से अपील

यात्रियों को हो रही परेशानियों पर इंडिगो ने अपनी चिंता जाहिर की है और प्रभावित यात्रियों तथा उद्योग हितधारकों से “दिल से माफी” मांगी है। एयरलाइन ने संकट के लिए मुख्य रूप से क्रू प्लानिंग में चुनौतियों, नए FDTL नियमों को लागू करने की अनिवार्यता, और मौसम संबंधी दिक्कतों के “कास्केडिंग इफेक्ट” को जिम्मेदार ठहराया है।

एयरलाइन ने कहा कि वे नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए, और विभिन्न हवाईअड्डा संचालकों के सहयोग से स्थिति को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इंडिगो ने यात्रियों से विनम्र अपील की है कि वे हवाईअड्डे के लिए निकलने से पहले कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर फ्लाइट-स्टेटस लिंक के माध्यम से अपनी उड़ानों की नवीनतम स्थिति की जाँच अवश्य कर लें।

आगे की योजना: 8 दिसंबर से उड़ानों की संख्या में कटौती

इस संकट से उबरने के लिए इंडिगो ने एक दीर्घकालिक योजना पेश की है। ताजा जानकारी के अनुसार, इंडिगो ने डीजीसीए को सूचित किया है कि वह 8 दिसंबर से अपनी उड़ानों की संख्या में कटौती करेगी। एयरलाइन ने अनुमान लगाया है कि उसका परिचालन 10 फरवरी, 2026 तक पूरी तरह से स्थिर और सामान्य हो पाएगा। हालाँकि, अगले कुछ दिनों में और उड़ानें रद्द होने की आशंका अभी भी बनी हुई है। एयरलाइन का यह निर्णय दिखाता है कि इस संकट से निकलने में अभी काफी समय लगेगा, और यात्रियों को आने वाले हफ्तों में भी सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

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