छत्तीसगढ़

IndiGo Legal Notice: इंडिगो की मुश्किलें बढ़ीं, रद्द उड़ानों के कारण भेजा गया कानूनी नोटिस

IndiGo Legal Notice: देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो द्वारा महज चार दिनों के भीतर 3450 से अधिक उड़ानों के अचानक रद्द किए जाने के गंभीर मामले में छत्तीसगढ़ की एक प्रमुख संस्था सिविल सोसायटी ने कड़ा रुख अपनाया है। सोसायटी ने इस बड़े पैमाने पर हुई अराजकता के खिलाफ एयरलाइन प्रबंधन को विधिक नोटिस (Legal Notice) जारी किया है। सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी द्वारा यह नोटिस सीधे इंडिगो एयरलाइंस के प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD/CEO) को भेजा गया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एयरलाइन का यह मनमाना कदम न केवल यात्रियों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है, बल्कि भारतीय अनुबंध कानूनों और नागरिक उड्डयन नियमों की भी घोर अवहेलना है।

IndiGo Legal Notice: यात्रियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन: मनमानी रद्दियाँ

नोटिस में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि इंडिगो एयरलाइंस ने बिना किसी पूर्व सूचना, पारदर्शी कारण और उचित स्पष्टीकरण दिए, हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को अत्यंत मनमाने ढंग से बाधित किया। इस अचानक रद्दीकरण के कारण यात्रियों को भारी आर्थिक नुकसान, असहनीय मानसिक कष्ट और अपूरणीय समय की हानि का सामना करना पड़ा है।

  • प्रभावित समूह: प्रभावित होने वालों में वरिष्ठ नागरिक, छोटे बच्चे, महिलाएँ, चिकित्सा उपचार के लिए यात्रा कर रहे रोगी और महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठकों में शामिल होने वाले व्यवसायी बड़ी संख्या में शामिल हैं।

  • परिणाम: सोसायटी ने कहा है कि इतने बड़े पैमाने पर अचानक रद्दीकरण इन यात्रियों के लिए किसी आपदा से कम साबित नहीं हुआ है। यह यात्रियों के प्रति एयरलाइन की गैर-जिम्मेदाराना नीतियों को उजागर करता है।

IndiGo Legal Notice: कानूनी आधार और क्षतिपूर्ति की मांग

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने अपने नोटिस में इंडिगो के कृत्य को कई भारतीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन बताया है:

  • अनुबंध भंग: इसे भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 के तहत ‘घोर अनुबंधभंग’ (Gross Breach of Contract) का स्पष्ट मामला माना गया है।

  • सेवा में कमी: इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) की श्रेणी में रखा गया है।

  • नियमों का उल्लंघन: इसके अलावा, यह विमानन नियम (Aviation Rules) और DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा जारी अनिवार्य दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है।

सोसायटी ने एयरलाइन को आदेश दिया है कि वह पाँच कार्य दिवसों के भीतर निम्नलिखित क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करे:

  • मुआवजा: प्रत्येक प्रभावित यात्री को उसके टिकट मूल्य का कम से कम दस गुना मुआवजा दिया जाए।

  • प्रतिपूर्ति: होटल, वैकल्पिक यात्रा टिकट, चिकित्सा खर्च और अन्य सभी प्रत्यक्ष नुकसानों की पूर्ण प्रतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

  • सार्वजनिक स्पष्टीकरण: बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करने के वास्तविक और पारदर्शी कारणों का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाए।

केंद्र सरकार से हस्तक्षेप और 9000 करोड़ का जुर्माना

सिविल सोसायटी ने इस मामले में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को भी विस्तृत शिकायत भेजी है। इस शिकायत में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने की मांग की गई है:

  1. विशेष जांच: DGCA द्वारा इस घटना की विशेष जांच कराई जाए।

  2. भारी जुर्माना: इंडिगो एयरलाइन पर 9000 करोड़ रुपये (लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का भारी जुर्माना लगाया जाए।

  3. कड़े कानून: भविष्य में ऐसी मनमानी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नए कानून बनाए जाएं।

निर्धारित समय सीमा के भीतर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

नोटिस में इंडिगो प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मुआवजा और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो सोसायटी प्रभावित यात्रियों के साथ मिलकर तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी। इन संभावित कानूनी कार्रवाइयों में शामिल हैं:सामूहिक मुकदमा: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में सामूहिक मुकदमा (Class Action Suit) दायर करना।दीवानी कार्यवाही: संबंधित दीवानी न्यायालयों में अनुबंधभंग और हुई हानि की वसूली के लिए कार्रवाई शुरू करना।आपराधिक शिकायत: DGCA और अन्य संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष आपराधिक शिकायत दर्ज कराना।

सोसायटी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इन सभी कानूनी प्रक्रियाओं में आने वाले खर्च, हर्जाने और शुल्क का दायित्व पूरी तरह से इंडिगो एयरलाइन पर होगा, क्योंकि यह पूरा संकट उसकी मनमानी और गैर-जिम्मेदाराना कॉर्पोरेट नीतियों का सीधा परिणाम है।

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