Indonesia earthquake : इंडोनेशिया की धरती गुरुवार सुबह एक बार फिर भयंकर भूकंप से थर्रा उठी। यह झटका सुलावेसी क्षेत्र के मिनाहासा प्रायद्वीप में महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.2 मापी गई। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस (GFZ) ने इस भूकंप की पुष्टि करते हुए बताया कि भूकंप का केंद्र 147 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। सुबह 4 बजकर 50 मिनट पर धरती में कंपन दर्ज किया गया, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया।
इंडोनेशिया में भूकंप कोई नई बात नहीं, लेकिन लगातार भूकंप आना चिंता का विषय बन गया है। महज दो दिन पहले सेराम क्षेत्र में भी भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 5.5 थी। यह झटका अंबोन से 244 किमी पूर्व-उत्तर-पूर्व और अमाहाई से 155 किमी दूर महसूस किया गया। उस समय भूकंप का केंद्र 15 किमी गहराई में था। लगातार आ रहे झटकों ने लोगों की नींद और चैन दोनों छीन लिए हैं।
इससे पहले जुलाई महीने में तनिम्बर द्वीप समूह के तट पर भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 6.7 रिकॉर्ड की गई थी। इसका केंद्र 98 किलोमीटर गहराई में था। वहीं मई में साउथ सुमात्रा क्षेत्र में 5.9 तीव्रता का झटका दर्ज हुआ था, जिसमें भूकंप का केंद्र केवल 10 किमी (6.21 मील) की गहराई पर था। बार-बार आ रहे इन शक्तिशाली भूकंपों ने इंडोनेशिया की भौगोलिक संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति ही इसके लिए सबसे बड़ा खतरा है। यह देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इंडोनेशिया सुंडा प्लेट पर बसा है, जो इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट और फिलीपींस प्लेट के साथ टकराव करती है। यह टकराव सुंडा ट्रेंच जैसे क्षेत्रों में भारी भूगर्भीय तनाव उत्पन्न करता है, जिससे अक्सर मेगाथ्रस्ट भूकंप आते हैं, और इनके परिणामस्वरूप सुनामी का खतरा बना रहता है।
भूकंप और सुनामी के जोखिम को देखते हुए इंडोनेशिया सरकार ने दो प्रमुख एजेंसियों को निगरानी के कार्य में लगाया है। ये हैं –
BMKG (मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी)
InaTEWS (इंडोनेशिया सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली)
इन एजेंसियों के माध्यम से आम लोग BMKG की वेबसाइट (inatews.bmkg.go.id) या USGS से नवीनतम अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। समय पर चेतावनी मिलने से जनहानि और वित्तीय नुकसान को रोका जा सकता है।
इंडोनेशिया को भूतकाल में भी कई घातक भूकंपों का सामना करना पड़ा है। 26 दिसंबर 2004 को सुमात्रा के पास आए 9.1 तीव्रता के भूकंप ने हिंद महासागर में विनाशकारी सुनामी उत्पन्न की थी, जिससे केवल इंडोनेशिया में 1.7 लाख से अधिक लोग मारे गए थे। वहीं, 28 सितंबर 2018 को सुलावेसी में आए 7.5 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई सुनामी से 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 2 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए थे।
इंडोनेशिया का लगातार भूकंपों से प्रभावित होना यह बताता है कि इस देश के लिए आपदा प्रबंधन और संरचनात्मक सुरक्षा उपाय कितने जरूरी हैं। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि रिंग ऑफ फायर पर बसे इस देश को लगातार सतर्क और सजग रहना होगा। सरकारी एजेंसियों को आम लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाने, भूकंपरोधी इमारतें बनाने और जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में और सख्ती से काम करना होगा, ताकि भविष्य में बड़े नुकसान से बचा जा सके।
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