Indonesia Social Media Ban
Indonesia Social Media Ban : डिजिटल दुनिया के बढ़ते खतरों से नई पीढ़ी को बचाने के लिए दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश इंडोनेशिया ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। शनिवार, 28 मार्च 2026 से इंडोनेशियाई सरकार ने देश के लगभग 7 करोड़ बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग के दरवाजों पर ताला लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का यह साहसिक फैसला उन सभी किशोरों पर लागू होगा जिनकी आयु 16 वर्ष से कम है। इस कानून के लागू होने के साथ ही इंडोनेशिया अब उन देशों की कतार में सबसे आगे खड़ा हो गया है जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अत्यधिक गंभीर हैं।
इंडोनेशियाई सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ही इस व्यापक प्रतिबंध की रूपरेखा तैयार कर ली थी। इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफी, साइबरबुलिंग और इंटरनेट की लत (Internet Addiction) जैसे भयावह खतरों से सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग से बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। सूचना मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्क्रीन टाइम के अत्यधिक बढ़ने से किशोरों में अवसाद और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं आम हो गई थीं, जिसे रोकना अब अनिवार्य हो गया था।
इंडोनेशिया की सूचना मंत्री मेउत्या हफीद ने शुक्रवार देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि तकनीकी कंपनियों के पास अब नियमों को मानने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है और ‘समझौते की कोई गुंजाइश’ बाकी नहीं बची है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कंपनियां स्थानीय कानूनों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें देश में अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ सकती हैं। इस सख्त रुख के बाद वैश्विक स्तर पर टेक जगत में हड़कंप मच गया है।
सरकार की चेतावनी का असर भी दिखने लगा है। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) और ‘बिगो लाइव’ ने अपने सिस्टम में बदलाव करते हुए यूजर की न्यूनतम आयु सीमा को अपडेट कर दिया है। वहीं, युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय वीडियो ऐप ‘टिकटॉक’ ने भी मंत्रालय के साथ परामर्श के बाद 16 साल से कम उम्र के अकाउंट्स को ब्लॉक करने या उन्हें नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता जताई है। मंत्री हफीद ने अन्य सभी ऐप्स और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे अपनी सेवाओं को तुरंत इंडोनेशियाई कानूनों के अनुरूप ढालें।
इंडोनेशिया की यह नई नीति ऑस्ट्रेलिया द्वारा पिछले साल दिसंबर में लागू किए गए कानूनों से प्रेरित मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया ने भी बच्चों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों को देखते हुए इसी तरह की पाबंदी लगाई थी। केवल एशिया ही नहीं, बल्कि यूरोप में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है। हाल ही में ब्रिटेन की संसद के ऊपरी सदन ने भी बच्चों पर सोशल मीडिया बैन के पक्ष में मतदान किया है। यह वैश्विक रुझान दर्शाता है कि अब सरकारें बड़ी तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही तय करने के मूड में हैं।
सोशल मीडिया कंपनियों की लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण हाल ही में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में देखने को मिला। वहां की एक जूरी ने मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) और यूट्यूब को उनके प्लेटफॉर्म्स के ‘नशे की लत लगाने वाले डिजाइन’ के लिए दोषी ठहराया। जूरी ने पाया कि इन ऐप्स की बनावट ने एक युवती को गंभीर मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुँचाया। सजा के तौर पर दोनों दिग्गज कंपनियों पर 6 मिलियन डॉलर (करीब 50 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया गया। इंडोनेशिया का यह सख्त कानून इसी वैश्विक कड़ी का हिस्सा है, जो बच्चों के डिजिटल अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
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