Indore Water Crisis: देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव रखने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। शहर के वार्ड क्रमांक 11 में दूषित पानी पीने की वजह से कई लोगों की जान चली गई है। जहाँ प्रशासनिक तौर पर अब तक 9 मौतों की पुष्टि की गई है, वहीं स्थानीय बीजेपी पार्षद कमल वाघेला का दावा है कि मौतों का यह आंकड़ा 15 तक पहुँच चुका है। स्वच्छता के मामले में लगातार सात बार नंबर वन रहने वाले शहर में इस तरह की घटना ने पूरी व्यवस्था और सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है।

Indore Water Crisis: उमा भारती का तीखा प्रहार: “यह मोहन यादव सरकार की परीक्षा की घड़ी है”
इस गंभीर मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में लिखा कि साल 2025 के अंत में इंदौर में हुई ये मौतें पूरे प्रदेश और सरकार के लिए शर्मिंदगी का विषय हैं। उमा भारती ने स्पष्ट किया कि स्वच्छता का अवॉर्ड जीतने वाले शहर में ज़हरीला पानी मिलना एक अक्षम्य अपराध है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को चेतावनी देते हुए कहा कि यह उनके नेतृत्व की परीक्षा की घड़ी है।
Indore Water Crisis: मुआवजे पर सवाल और ‘घोर प्रायश्चित’ की मांग
उमा भारती ने सरकार द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे पर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि किसी भी इंसान की जिंदगी की कीमत महज दो लाख रुपये नहीं हो सकती, क्योंकि अपनों को खोने वाले परिवार जीवनभर उस दुख को झेलते हैं। उन्होंने मांग की है कि इस ‘पाप’ का घोर प्रायश्चित किया जाए, पीड़ितों से माफी मांगी जाए और इस लापरवाही में शामिल निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के अधिकारियों को कठोरतम दंड दिया जाए। उमा भारती का यह बयान शासन और प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।
बीजेपी पार्षद का बड़ा खुलासा: अधिकारियों ने दबा रखी थी फाइलें
वार्ड-11 के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वाघेला के अनुसार, 12 नवंबर 2024 को ही नर्मदा की नई पाइपलाइन बिछाने के लिए फाइल तैयार कर ली गई थी, लेकिन लापरवाह अफसरों ने इसे सात महीनों तक ठंडे बस्ते में डाले रखा। भारी दबाव के बाद जुलाई 2025 में टेंडर तो जारी हुआ, लेकिन काम समय पर पूरा नहीं किया गया। पार्षद ने दावा किया कि 29 दिसंबर 2025 को जब बीमारी फैली, उससे पहले कई बार विधायक, महापौर और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें की गई थीं, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
सिस्टम की विफलता: 8 दिन बाद भी नहीं मिल सका लीकेज
हैरानी की बात यह है कि घटना को आठ दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन यह पता लगाने में असमर्थ रहा है कि आखिर गंदे पानी का लीकेज कहाँ से हो रहा है। पार्षद कमल वाघेला ने इसे ‘आपराधिक कृत्य’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि महापौर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि फंड का इंतज़ार किए बिना काम शुरू किया जाए, अधिकारियों ने मनमानी की और जनता के स्वास्थ्य को खतरे में डाला। फिलहाल एक व्यक्ति की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है और शहर के लोग दहशत में हैं कि आखिर कब तक उन्हें इस ‘ज़हरीले’ सिस्टम का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।


















