I-PAC Raid Case
I-PAC Raid Case : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य सरकार के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। कोलकाता स्थित चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के दफ्तर में हुई छापेमारी के मामले में अब देश की सर्वोच्च अदालत दखल देने जा रही है। गुरुवार, 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में इस विवाद से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई होगी, जिसके परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति और जांच एजेंसियों के कार्यक्षेत्र पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है। ईडी का आरोप बेहद गंभीर है; एजेंसी का कहना है कि ममता बनर्जी ने न केवल जांच प्रक्रिया में बाधा डाली, बल्कि जांच के दौरान मिले सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी की। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ इस मामले की बारीकियों को देखेगी। यह मामला अब केवल एक रेड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे तौर पर राज्य की मुखिया की कार्यशैली पर सवाल उठाता है।
ईडी ने केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को भी इस विवाद में लपेटा है। याचिका में पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। ईडी का दावा है कि इन अधिकारियों ने आई-पैक दफ्तर में छापेमारी के दौरान जांच दल को डराया, धमकाया और महत्वपूर्ण सामग्री को नष्ट करने में मदद की। जांच एजेंसी ने पूरे मामले की निष्पक्षता के लिए सीबीआई (CBI) जांच की मांग भी उठाई है।
प्रवर्तन निदेशालय की याचिका के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य हटा दिए गए या मिटा दिए गए। ईडी का दावा है कि ये सबूत कई राज्यों में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) की जांच से जुड़े थे। यदि ये सबूत नष्ट हो जाते हैं, तो भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों की कड़ियां टूट सकती हैं। इससे पहले कि ईडी सुप्रीम कोर्ट पहुंचती, ममता सरकार ने भी किसी भी एकपक्षीय आदेश को रोकने के लिए शीर्ष अदालत में ‘कैविएट’ दायर कर दी थी, जिससे पता चलता है कि सरकार भी कानूनी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले बुधवार को कोलकाता हाईकोर्ट में भी इस मामले की गूँज सुनाई दी। ईडी ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि इस केस की कार्यवाही स्थगित रखी जाए क्योंकि मामला अब उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है। बहस के दौरान ईडी ने तीखा सवाल किया कि “जब I-PAC एक स्वतंत्र संस्था है, तो सत्ताधारी दल टीएमसी (TMC) याचिकाकर्ता के रूप में क्यों खड़ी है?” इसके जवाब में राज्य सरकार ने तर्क दिया कि यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के दायरे में नहीं आता है। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि जब्त किया गया सामान ममता बनर्जी ले गईं, जिसके कारण कानूनी रूप से जब्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
I-PAC दफ्तर पर हुई इस रेड ने बंगाल में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार की साजिश बताते हुए कोलकाता की सड़कों पर विरोध मार्च निकाला। टीएमसी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियां आगामी चुनावों से पहले पार्टी के रणनीतिक दस्तावेजों और गुप्त डेटा को चुराने की कोशिश कर रही हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईडी का मुख्य उद्देश्य टीएमसी की हार्ड डिस्क और पार्टी के भविष्य के चुनावी कार्यक्रमों से जुड़े डेटा को जब्त करना था।
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