IPS Ratan Lal Dangi
IPS Ratan Lal Dangi: छत्तीसगढ़ शासन ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह बड़ी कार्रवाई एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बाद की गई है। गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, डांगी के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने उन्हें पद से हटाने का निर्णय लिया है। यह मामला प्रदेश के पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि डांगी एक रसूखदार अधिकारी माने जाते रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि रतन लाल डांगी के खिलाफ शिकायतों का सिलसिला पुराना है। लगभग 5 महीने पहले भी सरकार ने उन पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें महानिरीक्षक (IG) के महत्वपूर्ण पद से हटा दिया था। अब निलंबन की अवधि के दौरान, उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय (PHQ), नया रायपुर निर्धारित किया गया है। निलंबन के कड़े नियमों के तहत, वे बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के अपना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। शासन की इस सख्ती को जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा जा रहा है।
पीड़िता (SI की पत्नी) ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से आपबीती सुनाई। शिकायत के अनुसार, महिला और IPS डांगी की पहली मुलाकात 2017 में कोरबा में हुई थी, जहाँ डांगी एसपी के पद पर तैनात थे। शुरुआत में दोनों के बीच सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत शुरू हुई, जो समय के साथ बढ़ती गई। दंतेवाड़ा में पदस्थापना के दौरान, महिला वीडियो कॉल के जरिए उन्हें योग सिखाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह संपर्क उत्पीड़न में बदल गया।
महिला का आरोप है कि जैसे-जैसे रतन लाल डांगी का कद बढ़ता गया और वे राजनांदगांव व सरगुजा के आईजी बने, उन्होंने महिला को परेशान करना शुरू कर दिया। बिलासपुर आईजी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कथित उत्पीड़न अपने चरम पर पहुंच गया। शिकायत में दावा किया गया है कि डांगी अपनी पत्नी की अनुपस्थिति में महिला को जबरन बंगले पर बुलाते थे। यदि महिला आने से मना करती, तो उसे उसके पति (जो पुलिस विभाग में ही कार्यरत है) के तबादले और करियर खराब करने की धमकी दी जाती थी।
पीड़िता ने जांच टीम को बताया कि IPS डांगी उन पर वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रहने का मानसिक दबाव बनाते थे। सुबह 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक उन्हें उपलब्ध रहने को कहा जाता था। महिला ने यह भी दावा किया है कि उसके पास इस पूरे प्रकरण से जुड़े कई आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य और चैट्स मौजूद हैं, जो आरोपों की पुष्टि करते हैं। इन साक्ष्यों को विभागीय जांच समिति को सौंप दिया गया है, जो अब मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है।
शासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रतन लाल डांगी का आचरण ‘अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968’ और ‘अनुशासन एवं अपील नियम 1969’ के प्रावधानों के विपरीत पाया गया है। प्राथमिक दृष्टि में उनके कार्यों को संदिग्ध मानते हुए यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि महिला सुरक्षा और सेवा मर्यादा के उल्लंघन के मामलों में किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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