Iran Blacklist
Iran Blacklist : मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ ले चुका है। खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद, ईरान ने अब अपना रुख दुनिया की सबसे बड़ी टेक और रक्षा कंपनियों की ओर कर लिया है। मंगलवार, 31 मार्च 2026 को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने एक सनसनीखेज बयान जारी करते हुए अमेरिका की 18 दिग्गज कंपनियों पर हमले की सीधी चेतावनी दी है। इस घोषणा ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि वैश्विक व्यापार जगत में भी खलबली मचा दी है। ईरान का यह कदम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि अब जंग के मैदान केवल सीमाएं नहीं, बल्कि आधुनिक कॉर्पोरेट ऑफिस और डेटा सेंटर भी होंगे।
IRGC ने उन विशिष्ट कंपनियों के नामों का खुलासा किया है जिन्हें वह अपना लक्ष्य मान सकता है। इस सूची में सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रक्षा क्षेत्र के वैश्विक दिग्गज शामिल हैं। ईरान की चेतावनी के अनुसार, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, मेटा, इंटेल, और सिस्को जैसी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा। इसके अलावा ओरेकल, आईबीएम, डेल, पालेंटिर, एनवीडिया, जेपी मॉर्गन, टेस्ला, जनरल इलेक्ट्रिक, स्पायर सॉल्यूशंस, जी42, और बोइंग को भी संभावित लक्ष्यों की श्रेणी में रखा गया है। ईरान का कहना है कि ये कंपनियां केवल व्यापार नहीं कर रहीं, बल्कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के लिए तकनीकी मंच तैयार कर रही हैं।
ईरान ने इन कंपनियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। IRGC के अनुसार, ये सभी 18 कंपनियां इजरायली और अमेरिकी सैन्य व खुफिया एजेंसियों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं। ईरान का दावा है कि ये कंपनियां अपनी एडवांस सूचना प्रौद्योगिकी और एआई (AI) क्षमताओं का उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति बनाने और साइबर हमले करने के लिए कर रही हैं। विशेष रूप से OpenAI और एंथ्रोपिक जैसी एआई क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों का नाम भी इस साजिश में घसीटा गया है। ईरान का तर्क है कि चूंकि ये कंपनियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान विरोधी ऑपरेशन्स का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें अपनी रक्षा के लिए निशाना बनाना जायज है।
ईरान की इस ताजा धमकी के पीछे का मुख्य कारण उनके एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की हत्या है। IRGC ने पुष्टि की है कि हाल ही में एक अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में ब्रिगेडियर जनरल और चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ के सलाहकार जमशेद इशाकी की मौत हो गई है। इशाकी एक रसूखदार सैन्य रणनीतिकार थे, जिन पर अमेरिका ने पिछले साल ही कड़े प्रतिबंध लगाए थे। उनकी मौत ने ईरान के भीतर गुस्से की लहर पैदा कर दी है। IRGC ने साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में किसी भी ईरानी नेता या सैन्य अधिकारी की हत्या की जाती है, तो इसका सीधा जवाब दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में स्थित इन कंपनियों के कॉर्पोरेट कार्यालयों पर हमला करके दिया जाएगा।
इस धमकी का सबसे अधिक असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर पड़ने की संभावना है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों के बड़े क्षेत्रीय कार्यालय दुबई और अबू धाबी में स्थित हैं। ये शहर वैश्विक व्यापार के केंद्र हैं, लेकिन ईरान की धमकी के बाद यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि वह अपने साइबर हमलों और अन्य गुप्त ऑपरेशन्स के जरिए इन ठिकानों को नुकसान पहुंचा सकता है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इन कॉर्पोरेट ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं और क्या यह तनाव पूर्ण विकसित वैश्विक युद्ध में तब्दील होता है।
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