Iran Crisis 2026
Iran Crisis 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी अशांति और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान में बढ़ते तनाव और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसक कार्रवाई का जवाब देने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इन विकल्पों में ‘मिलिट्री ऑप्शन’ यानी सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। व्हाइट हाउस की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि ईरानी शासन निर्दोष नागरिकों पर बल प्रयोग बंद नहीं करता है, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा। ट्रंप का यह बयान क्षेत्र में युद्ध की संभावनाओं को प्रबल बना रहा है।
ट्रंप की चेतावनी के बाद तेहरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। खामेनेई शासन ने अमेरिका को आगाह किया है कि यदि उसने प्रदर्शनकारियों की रक्षा के नाम पर ईरान के खिलाफ बल का प्रयोग किया, तो वह चुप नहीं बैठेगा। ईरान ने सीधे तौर पर कहा है कि ऐसी स्थिति में अमेरिकी सेना के ठिकाने और इजरायल उनके प्राथमिक निशाने पर होंगे। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसे बाहरी हस्तक्षेप करार दिया है। ईरान के इस आक्रामक रुख ने वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है।
ईरान में दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब खूनी रूप ले लिया है। एसोसिएटेड प्रेस और ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी कार्रवाई में अब तक कम से कम 544 लोग मारे जा चुके हैं। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए कड़ा रुख अपनाया है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 10,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरान में फिलहाल इंटरनेट सेवाएं ठप हैं और फोन लाइनें कटी हुई हैं, जिससे वहां की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन हो गया है।
ईरान में जारी इस संकट के बीच सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें वायरल हो रही थीं कि ईरानी पुलिस ने छह भारतीय नागरिकों को भी गिरफ्तार किया है। हालांकि, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर स्पष्ट किया कि विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा फैलाई जा रही ये खबरें भ्रामक और गलत हैं। राजदूत ने सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध किया है कि वे केवल भरोसेमंद और आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही विश्वास करें।
इस बड़े जन-विद्रोह की जड़ें ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था में छिपी हैं। 28 दिसंबर को जब ईरानी करेंसी ‘रियाल’ में ऐतिहासिक गिरावट आई और वह एक डॉलर के मुकाबले 1.4 मिलियन के पार चली गई, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ा। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान में महंगाई असहनीय स्तर पर पहुंच चुकी है। शुरुआत में यह विरोध महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ था, लेकिन धीरे-धीरे इसने राजनीतिक रूप ले लिया। अब प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर ईरान की धार्मिक सरकार को चुनौती दे रहे हैं और सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे हैं।
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