Strait of Hormuz
Strait of Hormuz : मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में चल रहा संघर्ष अब एक अत्यंत विनाशकारी चरण में प्रवेश कर गया है। शनिवार को ईरान की शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में इजरायल से जुड़े एक वाणिज्यिक जहाज पर भीषण ड्रोन हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरानी सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस सुनियोजित हमले के बाद जहाज में भयंकर आग लग गई, जिससे पूरे समुद्री क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ईरानी मीडिया का दावा है कि यह कार्रवाई इजरायल द्वारा की गई पिछली सैन्य गतिविधियों का करारा जवाब है। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जलमार्गों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
ईरानी नौसेना के कमांडरों और आधिकारिक वेबसाइट ‘सेपाह न्यूज’ के मुताबिक, जिस जहाज को निशाना बनाया गया है, उसकी पहचान ‘MSC Ishyka’ के रूप में हुई है। हालांकि इस जहाज पर किसी तीसरे देश का झंडा लगा हुआ था, लेकिन ईरान का दावा है कि इसका वास्तविक मालिकाना हक इजरायली शासन के पास है। हमले के वक्त यह जहाज बहरीन के खलीफा बिन सलमान बंदरगाह के समीप मौजूद था। मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ड्रोन स्ट्राइक से ठीक पहले जहाज की लोकेशन इसी संवेदनशील इलाके में थी। फिलहाल, इजरायल ने इस हमले पर चुप्पी साध रखी है और किसी भी आधिकारिक प्रतिक्रिया से परहेज किया है।
ईरान और इजरायल के बीच यह सीधी जंग पिछले एक महीने से अधिक समय से सुलग रही है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, 28 फरवरी को स्थिति तब नियंत्रण से बाहर हो गई जब इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे। अपुष्ट रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने पूरे ईरान को आक्रोश से भर दिया है। प्रतिशोध की आग में जल रहे ईरान ने न केवल इजरायल, बल्कि मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान पहले ही एक अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराने का दावा कर चुका है, जिससे महाशक्तियों के बीच सीधा युद्ध छिड़ने का खतरा बढ़ गया है।
ईरान ने रणनीतिक चाल चलते हुए दुनिया की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है। इस रास्ते के बंद होने का सीधा अर्थ है वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का ठप होना। हालांकि, ईरान ने भारत जैसे अपने ‘मित्र देशों’ के लिए एक कूटनीतिक खिड़की खुली रखी है। ईरान का स्पष्ट रुख है कि उसकी दुश्मनी केवल अमेरिका और इजरायल से है, जबकि वह भारत की ऊर्जा जरूरतों में बाधा नहीं बनेगा। यह भारत के लिए एक बड़ी राहत की बात है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला तेल और गैस भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
युद्ध की इस भीषण तपिश के बीच भारत के लिए शनिवार को एक सुखद खबर आई। भारत सरकार ने आधिकारिक पुष्टि की है कि 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) लेकर आ रहा भारतीय टैंकर ‘Green Sanvi’ होर्मुज के खतरनाक रास्ते से सुरक्षित बाहर निकल गया है। इस जहाज पर 25 भारतीय नाविक सवार थे, जिनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी खरीदार होने के नाते, भारत के लिए यह मार्ग जीवनरेखा के समान है। पिछले तीन हफ्तों में नई दिल्ली ने अपनी प्रभावी कूटनीति और रणनीतिक सूझबूझ से कई जहाजों को इस युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकालने में सफलता प्राप्त की है।
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