Iran explosions: ईरान में बीते 12 घंटों के भीतर सात अलग-अलग स्थानों पर विस्फोट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इनमें कुछ शहर ऐसे भी थे जहां ईरान के परमाणु संयंत्र और सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। इन धमाकों ने देशभर में अफरा-तफरी मचा दी है और सवाल उठाए हैं कि क्या यह सिर्फ हादसे हैं या किसी गुप्त अभियान का हिस्सा?
धमाकों की शुरुआत कोम शहर से हुई, जहां एक रिहायशी अपार्टमेंट में जोरदार धमाका हुआ और इमारत पूरी तरह तबाह हो गई। ईरान की ओर से इसका कारण गैस रिसाव बताया गया। लेकिन यहीं से धमाकों का सिलसिला तेज हो गया और तेहरान, मशहाद, तबरीज और करज जैसे शहर भी इसकी चपेट में आ गए।
तेहरान के खतम अल-अनबिया इलाके में आग की बड़ी घटना हुई, जहां ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) का निर्माण मुख्यालय स्थित है। ये संस्था देश की सबसे ताकतवर सैन्य शाखाओं में से एक मानी जाती है। कुछ ही घंटों बाद मशहाद के एक अपार्टमेंट में भी धमाके के बाद आग लग गई। लगातार हो रही इन घटनाओं ने संदेह को और गहरा कर दिया।
तबरीज में हुए धमाकों के बाद ईरान को अपनी एयर डिफेंस प्रणाली सक्रिय करनी पड़ी। उसके बाद करज में भी धमाकों और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। ईरान सरकार ने इन सभी घटनाओं का कारण तकनीकी खामियों और गैस लीक को बताया, लेकिन इन इलाकों की रणनीतिक अहमियत ने सबका ध्यान खींचा।
कोम धमाके के कुछ ही घंटों बाद इजराइल के विदेश मंत्रालय ने फारसी भाषा में एक सोशल मीडिया पोस्ट की, जिसमें तंज कसते हुए कहा गया—”क्या यह बेहतर नहीं होता कि ईरान आतंकवादी संगठनों पर करोड़ों डॉलर खर्च करने के बजाय अपनी गैस पाइपलाइनों की मरम्मत कर लेता?” इस पोस्ट के बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या यह इत्तेफाक था या इजराइल ने किसी गुप्त ऑपरेशन का संकेत दिया है?
बीते हफ्तों में ईरान के उन सभी इलाकों में विस्फोट हुए हैं, जो सीधे तौर पर सेना या IRGC से जुड़े हैं। उदाहरण के तौर पर, तेहरान में सशस्त्र बलों के न्यायिक मुख्यालय में आग लगने के कुछ ही घंटे बाद IRGC के पूर्व कमांडर अली तैयब की मौत की खबर आई। इससे यह शक और गहरा हो गया कि ये घटनाएं मात्र हादसे नहीं बल्कि सुनियोजित हमले हैं।
इन घटनाओं के बीच इजराइल के रक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि “इजराइल के लंबे हाथ खामेनेई तक पहुंच सकते हैं, चाहे वो तेहरान, तबरीज या इस्फहान में क्यों न हों।” इस बयान को ईरान के सर्वोच्च नेता को निशाना बनाने की चेतावनी के तौर पर देखा गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सब इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद की एक गुप्त रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से खुफिया जंग चल रही है, लेकिन इस बार मोसाद का ऑपरेशन खुलकर सामने आता दिख रहा है। लगातार सैन्य ठिकानों पर हो रहे हमले इस बात के संकेत हैं कि ऑपरेशन गहराई तक पहुंच चुका है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में पहली बार यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि इजराइल पिछले कई वर्षों से ईरान में गुप्त ऑपरेशन चला रहा है। उन्होंने कहा, “अगर हमने ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना नहीं बनाया होता, तो वो अब तक परमाणु बम बना चुका होता।”
ईरान में हो रही इन घटनाओं का पैटर्न और समयबद्धता यह संकेत दे रही है कि यह सिर्फ तकनीकी खराबियों के चलते हुए धमाके नहीं हैं। अधिकतर धमाके उन्हीं जगहों पर हुए हैं जो रणनीतिक या सैन्य दृष्टि से अहम हैं। साथ ही, इजराइल की बयानबाज़ी और मोसाद की सक्रियता इस ओर इशारा कर रही है कि ईरान में एक छिपा हुआ युद्ध चल रहा है—जहां गोलियां नहीं, लेकिन रणनीति और जासूसी की आंच में पूरा देश झुलस रहा है।
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