Iran Hormuz Strait
Iran Hormuz Strait: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक व्यापार और सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान की ओर से एक ऐसा बयान सामने आया है, जो भारत जैसे एशियाई देशों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने घोषणा की है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz of Strait) केवल चुनिंदा देशों के लिए ही बंद रहेगा, जबकि अन्य देशों के लिए यह मार्ग पहले की तरह खुला रहेगा।
ईरान की समाचार एजेंसी आईआरआईबी (IRIB) के अनुसार, आईआरजीसी ने साफ किया है कि जलडमरूमध्य का मार्ग केवल अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए प्रतिबंधित है। ईरान का यह रुख उन अटकलों को विराम देने वाला है, जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान इस पूरे मार्ग को ब्लॉक कर देगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि शेष दुनिया, विशेष रूप से वे देश जो इस संघर्ष में पश्चिमी देशों का साथ नहीं दे रहे हैं, इस समुद्री रास्ते का उपयोग जारी रख सकते हैं। फारस की खाड़ी के बंदरगाहों के लिए एकमात्र समुद्री निकास मार्ग होने के कारण इस फैसले का वैश्विक महत्व है।
आईआरजीसी ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और विभिन्न प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध की स्थिति में इस जलमार्ग पर आवाजाही को नियंत्रित करने का संप्रभु अधिकार केवल ईरान के पास है। ईरान ने कड़े शब्दों में अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है कि यदि इस प्रतिबंधित जलमार्ग में उनके या उनके सहयोगियों के जहाज दिखाई देते हैं, तो ईरान उन पर सीधा हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। यह चेतावनी खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर ले जाने वाली है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है।
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हमलों के बाद से ही होर्मुज जलडमरूमध्य व्यावहारिक रूप से बंद चल रहा है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। दुनिया भर के विशेषज्ञ इस बात से चिंतित थे कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी व्यवधान और मंदी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अब ईरान द्वारा अन्य देशों को राहत देने से बाजार में थोड़ी स्थिरता आने की उम्मीद है।
इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि ईरान केवल चीन को ही इस मार्ग के उपयोग की अनुमति दे रहा है, क्योंकि चीन ने युद्ध के दौरान कूटनीतिक रूप से ईरान का समर्थन किया है। लेकिन ताजा बयान में “पश्चिमी सहयोगियों के अलावा सबके लिए खुला” शब्द का इस्तेमाल भारत के लिए बेहद सकारात्मक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल और गैस) के लिए काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर है। ईरान का यह फैसला भारत के साथ उसके पुराने और रणनीतिक संबंधों की मजबूती को दर्शाता है।
ईरान के इस कदम को एक बड़ी कूटनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिमी देशों को अलग-थलग करके और शेष दुनिया को व्यापार की अनुमति देकर ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वैश्विक समुदाय पूरी तरह से उसके खिलाफ न खड़ा हो। अब देखना यह होगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के इस “नियंत्रित प्रतिबंध” पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे इस जलमार्ग में अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य बल का प्रयोग करेंगे।
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