Iran Israel war
Iran Israel war: मध्य पूर्व में जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने एक ऐसा गहरा जख्म दिया है, जिसे इतिहास के पन्नों से कभी मिटाया नहीं जा सकेगा। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग के चौथे दिन एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है। ईरान के दक्षिणी प्रांत होर्मोजगान के मिनाब शहर में आज उन 165 मासूम स्कूली बच्चियों को अंतिम विदाई दी गई, जिनकी जान एक बर्बर हमले में चली गई। जब एक साथ कतारों में सजे इन नन्हीं बच्चियों के ताबूतों को देखा गया, तो पूरा शहर मातम के समंदर में डूब गया। यह दृश्य चीख-चीख कर युद्ध की निरर्थकता की गवाही दे रहा था।
यह रूह कंपा देने वाली त्रासदी 28 फरवरी 2026 को घटित हुई, जब मिनाब शहर के एक प्रतिष्ठित कन्या विद्यालय को निशाना बनाया गया। उस वक्त स्कूल में कक्षाएं सुचारू रूप से चल रही थीं और मासूम छात्राएं अपने भविष्य के सपने बुन रही थीं। अचानक हुए जोरदार धमाके ने स्कूल की इमारत के एक बड़े हिस्से को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। घंटों चले थका देने वाले राहत और बचाव कार्य के बाद जब मलबे से एक-एक कर मासूमों के बेजान शरीर निकलने शुरू हुए, तो मौतों का आंकड़ा 165 तक जा पहुँचा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जान गंवाने वाली अधिकांश बच्चियां प्राथमिक कक्षाओं की छात्राएं थीं, जिनका वैश्विक राजनीति या युद्ध से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था।
आज यानी 3 मार्च को इन शहीद छात्राओं के लिए सामूहिक जनाजे की नमाज अदा की गई। मिनाब शहर के मुख्य मैदान और आसपास की सभी मस्जिदों में हजारों की तादाद में स्थानीय नागरिक और पड़ोसी जिलों से आए लोग इकट्ठा हुए। जैसे ही एक साथ 165 छात्राओं की शवयात्रा निकली, सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। वातावरण में केवल सिसकियों और चीख-पुकार की आवाजें गूंज रही थीं। माता-पिता अपनी लाडलियों के ठंडे पड़ चुके शरीरों से लिपटकर रोते बिलखते नजर आए। भारी मन और नम आंखों के साथ इन मासूमों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
अपनी बेटियों को खोने के गम और इस जघन्य अपराध के विरोध में आज पूरे मिनाब शहर में सन्नाटा पसरा रहा। सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान और बाजार पूरी तरह बंद रहे। शोक संतप्त नागरिकों ने अपनी बांहों पर काली पट्टियां बांधकर इस हिंसा के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। शहर के विभिन्न हिस्सों में शांति मार्च निकाले गए, जिनमें लोगों ने युद्ध रोकने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर क्यों मासूम बच्चों को इस सत्ता की जंग की बलि चढ़ाया जा रहा है।
इस भीषण त्रासदी के तत्काल बाद ईरानी प्रशासन ने मिनाब के सभी स्कूल परिसरों को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश जारी किया है। देश के अन्य संवेदनशील प्रांतों और शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा कर दिया गया है। सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि इस हमले की एक उच्च-स्तरीय जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसके बाद ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य और कूटनीतिक जवाबी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, पूरा ईरान इन 165 कलियों के असामयिक मुरझाने के शोक में डूबा हुआ है और न्याय की गुहार लगा रहा है।
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