Share Market Crash
Share Market Crash: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की नींव हिला दी। वैश्विक संकेतों और युद्ध की आहट के बीच घरेलू बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। सुबह कारोबार शुरू होते ही निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई, जिससे बीएसई (BSE) सेंसेक्स एक समय 1316.76 अंक की भारी गिरावट के साथ 73,216.20 के स्तर पर आ गया। बाजार में यह बिकवाली इतनी तीव्र थी कि दिग्गज शेयरों के भाव ताश के पत्तों की तरह ढह गए। निवेशकों को डर है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और बिगड़ती है, तो बाजार में अभी और भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
सेंसेक्स के साथ-साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 (NSE Nifty50) भी इस वैश्विक दबाव को झेलने में नाकाम रहा। निफ्टी 420.30 अंक टूटकर 22,694.20 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 17 अप्रैल 2025 के बाद यह पहला मौका है जब निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला है। निफ्टी पर गिरावट का नेतृत्व करने वाले प्रमुख स्टॉक्स में हिंडाल्को, टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), महिंद्रा एंड महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शामिल रहे। हालांकि, इस चौतरफा बिकवाली के बीच मैक्स हेल्थकेयर और ओएनजीसी (ONGC) के शेयरों में मामूली रिकवरी देखी गई, जो बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश कर रहे थे।
बाजार की चौतरफा गिरावट का असर हर सेक्टर पर साफ दिखाई दे रहा है। सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो ऑटो, मीडिया, बैंकिंग, मेटल और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कोई भी ऐसा सेक्टर नहीं बचा जो इस भू-राजनीतिक संकट से अछूता रहा हो। सबसे ज्यादा मार मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर पड़ी है, जो 2% से ज्यादा गिरकर कारोबार कर रहे हैं। छोटे और मध्यम निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारी सेंध लगी है, जिससे बाजार में कमजोरी का माहौल और गहरा गया है।
बाजार में आई इस सुनामी का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता है। सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड 0.66% गिरकर 111.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 98.16 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहा। भले ही कीमतों में मामूली गिरावट दिखी हो, लेकिन निवेशकों को डर है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति (Inflation) का संकट खड़ा हो जाएगा।
बाजार की इस अस्थिरता के पीछे मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता वाकयुद्ध है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों की आवाजाही के लिए नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर भीषण हमला करेगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ने कोई सैन्य दुस्साहस किया, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा केंद्रों और जल शोधन संयंत्रों को नष्ट कर देगा। इस भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सहमा दिया है, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिल रहा है।
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