Iran-Kuwait War
Iran-Kuwait War: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। इजरायल और ईरान एक-दूसरे के आर्थिक और रणनीतिक बुनियादी ढांचों को निशाना बना रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है। ताजा घटनाक्रम में इजरायली सेना ने ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल जोन पर भीषण हमला किया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 5 लोगों की जान चली गई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक आर्थिक नुकसान का आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन इस हमले ने तेहरान को उग्र जवाबी कार्रवाई के लिए उकसा दिया है।
इजरायली हमले के जवाब में ईरान ने अमेरिका समर्थित देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान ने कुवैत के महत्वपूर्ण पावर प्लांट पर ड्रोन से हमला किया, जिससे वहां भारी तबाही मची है। कुवैत के विद्युत और जल मंत्रालय की प्रवक्ता फातिमा अब्बास जोहर हयात ने पुष्टि की है कि ईरानी ड्रोनों ने दो बिजली और जल शोधन संयंत्रों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस हमले के कारण पावर प्लांट की दो प्रमुख इकाइयों को बंद करना पड़ा है, जिससे बड़े इलाके में बिजली संकट पैदा हो गया है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी की जान नहीं गई।
जंग की इस आग के बीच ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर अली अब्दुल्लाही ने अमेरिका और इजरायल को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के मुख्य कमांडर ने शनिवार को कहा कि यदि ईरान की राष्ट्रीय संपत्ति या बुनियादी ढांचे पर आंच आई, तो पश्चिम एशिया में मौजूद हर अमेरिकी सैन्य अड्डा और इजरायली ढांचा ईरान के “विनाशकारी और निरंतर” हमलों की जद में होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी सशस्त्र बल अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए एक पल भी नहीं हिचकिचाएंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध में बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को खुली चुनौती दी है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में याद दिलाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए दिया गया समय अब समाप्त हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए लिखा, “समय खत्म हो रहा है—अब से ठीक 48 घंटे बाद उन पर कहर टूट पड़ेगा।” ट्रंप ने पहले भी धमकी दी थी कि यदि ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता है, तो अमेरिका उसके सभी बिजली संयंत्रों को मलबे में तब्दील कर देगा।
होर्मुज की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाकर इस मार्ग को पूरी तरह खुलवाना है। 21 मार्च को दी गई पहली धमकी के बाद से समय सीमा कई बार बढ़ाई गई, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन किसी समझौते के मूड में नहीं दिख रहा है। उधर, ईरानी कमांडर अब्दुल्लाही ने ट्रंप के इन बयानों को “एक हारे हुए और घबराए हुए राष्ट्रपति की मूर्खतापूर्ण हरकत” करार दिया है।
जैसे-जैसे हमले तेज हो रहे हैं, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों में डर का माहौल है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस युद्ध में अकेले नहीं डूबेगा और पड़ोसी देशों के संसाधनों को भी निशाना बनाएगा। कुवैत पर हुआ हमला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कूटनीतिक प्रयास विफल होते दिख रहे हैं और अब पूरी दुनिया की नजरें उन 48 घंटों पर टिकी हैं, जो ट्रंप ने ईरान को दिए हैं। यदि युद्ध और भड़का, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और सुरक्षा ढांचे पर इसके गंभीर परिणाम होंगे।
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