Iran-Israel War
Iran-Israel War: 13 मार्च 2026 की तारीख इतिहास के पन्नों में एक काले दिन के रूप में दर्ज हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है जहाँ से शांति की कोई भी राह नजर नहीं आ रही। ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका और नाटो (NATO) के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। इन हमलों ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, बल्कि दुनिया के सामने एक संभावित परमाणु संघर्ष (Nuclear War) की भयावह आशंका भी पैदा कर दी है। ईरान की इस आक्रामकता ने वैश्विक शक्तियों को युद्ध के मैदान में सीधे आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
ईरान ने तुर्किये स्थित ‘इंसर्लिक एयरबेस’ (Incirlik Airbase) पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर सीधे वाशिंगटन को चुनौती दी है। तुर्किये के रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि की है। यह हमला इसलिए अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि इंसर्लिक बेस पर अमेरिका के ‘टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन’ तैनात हैं। सौभाग्य से, पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात नाटो के उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम ने एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। यदि यह मिसाइल बेस से टकराती, तो एक बड़ी परमाणु त्रासदी हो सकती थी। फिलहाल तुर्किये इस गंभीर स्थिति को लेकर तेहरान के साथ कूटनीतिक संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है।
ओमान सागर से आ रही रिपोर्टें और भी चिंताजनक हैं। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने सनसनीखेज दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ पर मिसाइल से सटीक हमला किया है। IRGC के प्रवक्ता के अनुसार, हमले के बाद अमेरिकी युद्धपोत पीछे हटने को मजबूर हो गया। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने ईरानी दावों का कड़ा खंडन किया है और कहा है कि उनके बेड़े पर कोई सफल हमला नहीं हुआ है। दावों और प्रति-दावों के इस खेल ने समुद्र में तैनात नौसैनिक बेड़ों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।
ईरान की आक्रामकता केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रही। खबरें हैं कि संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख वैश्विक शहर दुबई पर भी बड़ा हमला किया गया है। इसके जवाब में अमेरिका ने यूरोप में तैनात अपने सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को तत्काल मिडिल ईस्ट में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। वहीं इराक में भी युद्ध की आग भड़क रही है, जहाँ अमेरिकी सेना ने अपने घातक ‘लुकास ड्रोन’ का उपयोग कर ईरान समर्थित ‘पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस’ (PMF) के ठिकानों पर भीषण स्ट्राइक की है। इराक अब इस महायुद्ध का एक नया फ्रंट बनता जा रहा है।
ईरानी हमलों के प्रतिशोध में अमेरिका ने तेहरान के वरमिन इलाके और पूर्वी तेहरान स्थित सैन्य कमांड मुख्यालय पर भीषण एयरस्ट्राइक की है। इन हमलों के बाद नाटो अब एक ‘विध्वंसक जंग’ के लिए कमर कसता दिख रहा है। जर्मनी ने लिथुआनिया से लेकर अपनी सीमाओं तक अब तक का सबसे बड़ा ‘मेडिकल इवैक्युएशन’ और सैन्य अभ्यास शुरू किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह सबसे बड़ी मेडिकल ड्रिल है, जो स्पष्ट संकेत देती है कि पश्चिमी देश एक ऐसे बड़े युद्ध की तैयारी कर रहे हैं जिसमें बड़े पैमाने पर सैनिकों के घायल होने और मरने की आशंका है।
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