Iran New Security Chief
Iran New Security Chief: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को नया नेतृत्व प्रदान किया है। पूर्व सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की मौत के करीब एक सप्ताह बाद, तेहरान ने मोहम्मद बाकर जुलकद्र को उनका उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने मंगलवार को इस नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि की। जुलकद्र का चयन ऐसे समय में किया गया है जब ईरान अपने अस्तित्व की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है। वह न केवल ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के पूर्व कमांडर रह चुके हैं, बल्कि रणनीतिक योजना बनाने में भी माहिर माने जाते हैं।
मोहम्मद बाकर जुलकद्र ईरानी सैन्य और राजनीतिक ढांचे का एक जाना-माना चेहरा हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर रह चुके जुलकद्र के पास युद्धक्षेत्र का व्यापक अनुभव है। इस नई जिम्मेदारी से पहले वे ईरान की ‘कार्यकुशलता परिषद’ के सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी नियुक्ति यह संकेत देती है कि ईरान अपनी सुरक्षा नीतियों में और अधिक कड़ा रुख अपना सकता है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि जुलकद्र की कमान में रिवोल्यूशनरी गार्ड की सक्रियता बढ़ सकती है, जो वर्तमान युद्ध में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
ईरान के लिए अली लारीजानी की मौत एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है। 17 मार्च को तेहरान ने पुष्टि की थी कि इजरायल द्वारा किए गए एक सटीक हवाई हमले (Air Strike) में लारीजानी, उनके बेटे और उनके अंगरक्षकों की मौत हो गई थी। 67 वर्षीय लारीजानी को ईरान के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में गिना जाता था। वे न केवल सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के विश्वासपात्र थे, बल्कि परमाणु वार्ता के दौरान पश्चिम के साथ संवाद का नेतृत्व करने के लिए भी जाने जाते थे। उन्हें कट्टरपंथियों और उदारवादियों के बीच सेतु माना जाता था, जिनके जाने से ईरान के नेतृत्व में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस महायुद्ध का आज 25वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि तेहरान के साथ बातचीत चल रही है और युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। दुनिया के कई अन्य देश भी मध्यस्थता की कोशिशें कर रहे हैं। हालांकि, शांति के इन दावों के विपरीत जमीनी हकीकत काफी खौफनाक है। मंगलवार (24 मार्च) को ही ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों के ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से भीषण बमबारी की है। हमलों की इस निरंतरता ने शांति की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है।
मोहम्मद बाकर जुलकद्र की नियुक्ति के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान झुकने के मूड में नहीं है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय संघर्ष विराम (Ceasefire) के लिए दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान अपने सैन्य नेतृत्व को मजबूत कर जवाबी हमलों की रणनीति तैयार कर रहा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि जुलकद्र का अनुभव ईरान को इस संकट से बाहर निकाल पाता है या यह युद्ध और अधिक विनाशकारी रूप अख्तियार करेगा। वाशिंगटन और यरूशलेम की नजरें अब तेहरान की अगली चाल पर टिकी हैं।
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