Nuclear Jacket
Nuclear Jacket : ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ता तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में अमेरिका के नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक ऐसी आशंका जाहिर की है जिसने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। वेंस का दावा है कि ईरान पारंपरिक मिसाइल तकनीक के बजाय अब ‘सुसाइड न्यूक्लियर बॉम्बर’ की तर्ज पर छोटे परमाणु हथियार यानी ‘न्यूक्लियर जैकेट’ विकसित करने की फिराक में है। यह रणनीति न केवल युद्ध के तौर-तरीकों को बदल सकती है, बल्कि सीधे तौर पर अमेरिकी धरती को निशाना बनाने की एक सोची-समझी चाल मानी जा रही है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अनुसार, ईरान बड़ी चालाकी से अपने परमाणु कार्यक्रम को नए सांचे में ढाल रहा है। उनका कहना है कि ईरान ऐसे छोटे परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है जिन्हें एक व्यक्ति आसानी से पहनकर या ले जाकर किसी घनी आबादी वाले क्षेत्र में विस्फोट कर सके। वेंस ने संकेत दिया कि ईरान का यह मॉडल दुनिया के सबसे छोटे परमाणु बमों की तकनीक पर आधारित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिका के पास पहले से ही 23 किलोग्राम वॉरहेड वाला छोटा परमाणु बम मौजूद है, जिसकी क्षमता 10 टन TNT के बराबर होती है। यदि ईरान ऐसी तकनीक हासिल कर लेता है, तो वह बिना किसी लंबी दूरी की मिसाइल के भी अमेरिका में तबाही मचाने में सक्षम हो जाएगा।
ईरान की आक्रामक नीति का अंदाजा उसकी आधिकारिक मानी जाने वाली एजेंसी ‘तस्नीम न्यूज’ के हालिया रुख से लगाया जा सकता है। IRGC समर्थित इस एजेंसी ने एक संपादकीय में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने के संकेत दिए हैं। लेख में तर्क दिया गया है कि जब दुनिया के अन्य शक्तिशाली देश अंतरराष्ट्रीय नियमों और संधियों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो ईरान पर ही इन पाबंदियों का बोझ क्यों डाला जाए? NPT से हटने का सीधा अर्थ यह होगा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय निगरानी से मुक्त होकर मनचाहे स्तर तक यूरेनियम का संवर्धन कर सकेगा, जो परमाणु बम बनाने की दिशा में अंतिम कदम होगा।
तकनीकी आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति काफी गंभीर नजर आती है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में 60 प्रतिशत तक संवर्धित लगभग 440 किलो यूरेनियम का भंडार मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम को 90 प्रतिशत तक संवर्धित करना आवश्यक होता है। गणितीय आधार पर देखा जाए तो 440 किलो यूरेनियम से ईरान कम से कम 11 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है। संवर्धन की यह गति दर्शाती है कि ईरान ‘ब्रेकआउट पॉइंट’ के बेहद करीब है, जहां से परमाणु शक्ति संपन्न देश बनने में उसे बहुत कम समय लगेगा।
ईरान की इस नई रणनीति ने अमेरिका की चिंताएं तीन मुख्य कारणों से बढ़ा दी हैं:
मिसाइल तकनीक की कमी की भरपाई: ईरान के पास फिलहाल ऐसी कोई इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं है जो सीधे अमेरिका तक पहुंच सके। लेकिन ‘न्यूक्लियर जैकेट’ के जरिए उसे किसी रॉकेट की जरूरत नहीं होगी; एक आत्मघाती हमलावर ही काफी होगा।
स्लीपर सेल्स का नेटवर्क: अमेरिका में ईरान से जुड़े कई सक्रिय स्लीपर सेल्स की मौजूदगी की आशंका जताई जाती है। वेंस का मानना है कि इन स्लीपर सेल्स को रोकना नामुमकिन है और यदि वे ‘न्यूक्लियर जैकेट’ के साथ घुसपैठ करने में सफल रहे, तो सुरक्षा एजेंसियां लाचार साबित हो सकती हैं।
सीमित लेकिन घातक तबाही: भले ही ये छोटे बम एक पूरे देश को नष्ट न कर सकें, लेकिन एक छोटे इलाके या शहर के हिस्से को पल भर में राख करने की क्षमता रखते हैं। जेडी वेंस के मुताबिक, यदि एक साथ हजारों नागरिक मारे जाते हैं, तो इससे होने वाला मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक नुकसान पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने के लिए पर्याप्त होगा।
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