अंतरराष्ट्रीय

Iran-US Crisis: “हम दुश्मन नहीं, पीड़ित हैं”; ईरानी राष्ट्रपति का अमेरिकी जनता को भावुक खत, ट्रंप को दी कड़ी चेतावनी

Iran-US Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की बढ़ती पदचापों के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कूटनीतिक कदम उठाया है। उन्होंने अमेरिकी जनता के नाम एक लंबी और विस्तृत चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” (America First) नीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पेजेश्कियन ने अमेरिकी नागरिकों से अपील की है कि वे मुख्यधारा के मीडिया द्वारा फैलाई जा रही “बनावटी कथाओं” और “भ्रम के जाल” से बाहर निकलकर देखें। उन्होंने पूछा कि क्या ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताएं वास्तव में अमेरिकी हितों की रक्षा कर रही हैं या वे किसी और के एजेंडे को पूरा कर रहे हैं।

युद्ध की कीमत और मानवीय सरोकार: आखिर किसके हित सध रहे हैं?

अपनी चिट्ठी में ईरानी राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर अमेरिकी करदाताओं और आम नागरिकों से संवाद किया। उन्होंने कड़ा सवाल पूछते हुए लिखा, “इस विनाशकारी युद्ध से अमेरिकी जनता को क्या हासिल हो रहा है?” पेजेश्कियन ने आगे कहा कि निर्दोष बच्चों की हत्या करना, कैंसर के इलाज वाली जीवनरक्षक दवाओं की फैक्ट्रियों को तबाह करना और किसी संप्रभु देश को ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी देना, क्या अमेरिकी मूल्यों का हिस्सा है? उन्होंने चेतावनी दी कि इन हरकतों से दुनिया भर में अमेरिका की वैश्विक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है, जिसका खामियाजा भविष्य में अमेरिका को भुगतना पड़ सकता है।

ईरान खतरा नहीं, बल्कि शिकार: हमलों का सिलसिलेवार ब्योरा

पेजेश्कियन ने पश्चिमी देशों द्वारा ईरान को एक ‘वैश्विक खतरा’ बताए जाने के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जब ईरानी वार्ताकार परमाणु समझौते के लिए मेज पर बैठे थे, तब भी ईरान पर दो बार बड़े हमले किए गए। पहला हमला जून 2025 में इजरायल द्वारा शुरू किए गए 12 दिवसीय युद्ध के दौरान हुआ, जिसमें अमेरिका भी शामिल था। दूसरा हमला इसी साल फरवरी 2026 के अंत में किया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना सीधे तौर पर ईरान की आम जनता के खिलाफ युद्ध अपराध है, जो पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और आक्रोश के बीज बो रहा है।

ट्रंप की ‘विनाश’ वाली धमकी और ईरान का कड़ा पलटवार

यह चिट्ठी डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई उस ताजा धमकी के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) न खोलने पर ईरान को “विनाश के गर्त” में धकेलने की बात कही थी। ट्रंप ने यह दावा भी किया था कि ईरानी राष्ट्रपति ने युद्धविराम की गुहार लगाई है। इस पर पलटवार करते हुए पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी ऐसी कोई मांग नहीं की है और ट्रंप के दावे पूरी तरह आधारहीन हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की शत्रुता अमेरिकी जनता से नहीं, बल्कि उन गलत नीतियों से है जो मानवता के खिलाफ हैं।

इजरायल का ‘प्रॉक्सी’ बना अमेरिका: बेंजामिन नेतन्याहू पर गंभीर आरोप

ईरानी राष्ट्रपति ने अपनी चिट्ठी में इजरायल की भूमिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि क्या ट्रंप प्रशासन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा “मैनिपुलेट” (भ्रमित) किया जा रहा है? विशेषज्ञों का भी मानना है कि नेतन्याहू दशकों से वाशिंगटन को तेहरान के खिलाफ भड़काते रहे हैं। पेजेश्कियन ने लिखा कि इजरायल अब अपनी गलतियों और फिलिस्तीनियों के खिलाफ किए जा रहे अपराधों से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए ईरान का हौआ खड़ा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल चाहता है कि अमेरिका “आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी टैक्सपेयर के डॉलर” तक ईरान से लड़ता रहे।

शांति के लिए कूटनीति ही एकमात्र विकल्प

चिट्ठी के अंत में पेजेश्कियन ने शांति की बहाली के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन आत्मसम्मान के साथ समझौता न करने की बात भी कही। उन्होंने अमेरिकी जनता से आग्रह किया कि वे अपनी सरकार पर दबाव बनाएं ताकि इस अनावश्यक रक्तपात को रोका जा सके। ईरानी राष्ट्रपति का यह पत्र न केवल एक कूटनीतिक दस्तावेज है, बल्कि यह युद्ध के मुहाने पर खड़े दो देशों के बीच संवाद का एक आखिरी प्रयास भी नजर आता है। अब देखना यह है कि व्हाइट हाउस और अमेरिकी जनता इस भावुक लेकिन तार्किक अपील पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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