Iran Protest 2026
Iran Protest 2026: ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। पिछले एक महीने से जारी आर्थिक बदहाली ने अब एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। गुरुवार, 8 जनवरी 2026 की रात को ईरान के प्रमुख शहरों में जो मंजर देखा गया, उसने सरकार की नींद उड़ा दी है। तेहरान से लेकर मशहद तक, हजारों लोग सड़कों पर उतरकर वर्तमान सत्ता के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं। इस अचानक भड़के गुस्से के पीछे निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के एक संदेश को मुख्य चिंगारी माना जा रहा है।
इन प्रदर्शनों को तब नई ऊर्जा मिली जब अमेरिका में रह रहे ईरान के अंतिम शाह के बेटे, रजा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने ईरानी जनता से रात 8 बजे एकजुट होकर सड़कों पर निकलने की भावुक अपील की थी। उनकी इस अपील का असर इतना व्यापक था कि कुछ ही घंटों के भीतर देश के अलग-अलग हिस्सों में जनसैलाब उमड़ पड़ा। बिगड़ते हालात और सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए ईरानी सरकार ने आनन-फानन में पूरे देश में इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाएं बंद कर दी हैं। रजा पहलवी ने इस कार्रवाई पर कहा कि शासन लोगों की आवाज को दबाने के लिए संचार के रास्ते बंद कर रहा है, लेकिन आजादी की मांग अब रुकने वाली नहीं है।
31 अक्टूबर 1960 को जन्मे रजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं। साल 1967 में उन्हें आधिकारिक तौर पर ईरान का क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था। लेकिन 1979 की ऐतिहासिक इस्लामिक क्रांति ने ईरान की तकदीर बदल दी और शाही परिवार को देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा। रजा पहलवी ने अमेरिका में राजनीति विज्ञान की शिक्षा ली है। आज वह खुद को एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और मानवाधिकारों के समर्थक नेता के रूप में पेश करते हैं। वह लंबे समय से ईरान में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना की वकालत कर रहे हैं, जो उन्हें वर्तमान धार्मिक नेतृत्व के कट्टर विरोधियों की कतार में सबसे आगे खड़ा करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विद्रोह की जड़ में केवल राजनीतिक कारण नहीं, बल्कि गहरा आर्थिक संकट है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रहे ईरान की अर्थव्यवस्था वर्तमान में वेंटिलेटर पर है। ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच चुकी है, जिससे आम आदमी की क्रय शक्ति समाप्त हो गई है। कमरतोड़ महंगाई और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जब बुनियादी जरूरतें पूरी करना असंभव हो गया, तो मध्यम वर्ग और युवाओं का गुस्सा ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘पहलवी लौटेंगे’ जैसे नारों के साथ सड़कों पर फूट पड़ा।
विरोध की आवाज को कुचलने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों ने कड़ा रुख अपनाया है। कई शहरों से प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और गोलीबारी की खबरें आ रही हैं। अब तक की रिपोर्टों के अनुसार, इन झड़पों में कम से कम 42 लोगों की जान जा चुकी है। मानवाधिकार संगठनों ने आशंका जताई है कि इंटरनेट बंद होने के कारण हताहतों और गिरफ्तारियों का वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। सरकार का तर्क है कि ये प्रदर्शन विदेशी ताकतों के इशारे पर किए जा रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारी इसे अपनी अस्तित्व की लड़ाई बता रहे हैं।
मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की तीव्रता और इसमें शाही परिवार के प्रति बढ़ता समर्थन ईरान के धार्मिक नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद, लोग पारंपरिक तरीकों से एकजुट हो रहे हैं। वैश्विक समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान की सरकार बातचीत का रास्ता चुनेगी या दमन चक्र और तेज होगा। फिलहाल, ईरान की सड़कें जल रही हैं और भविष्य अनिश्चितता के घेरे में है।
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