Iran Protests:
Iran Protests: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने के बीच, देश के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के निर्वासित पुत्र, रजा पहलवी ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। शुक्रवार को उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधा संपर्क साधते हुए ईरान की स्थिति में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक अत्यंत “अत्यावश्यक और तत्काल अपील” जारी की। उन्होंने कहा कि ईरान के नागरिक अपनी स्वतंत्रता के लिए सड़कों पर मौत से लड़ रहे हैं और इस निर्णायक मोड़ पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन ही उन्हें दमनकारी शासन से बचा सकता है।
राजकुमार रजा पहलवी ने अपनी पोस्ट में ईरान के भीतर की भयावह स्थिति का वर्णन करते हुए बताया कि वहां की जनता न केवल सुरक्षा बलों की गोलियों का सामना कर रही है, बल्कि उन्हें शेष दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि ईरान में इंटरनेट सेवाएं और लैंडलाइन फोन पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। पहलवी के अनुसार, यह “डिजिटल ब्लैकआउट” इसलिए किया गया है ताकि शासन की क्रूरता को दुनिया की नजरों से छिपाया जा सके। उन्होंने ट्रंप को संबोधित करते हुए लिखा कि समय बहुत कम है और अगले कुछ घंटों में हजारों लोग फिर से सड़कों पर उतरने वाले हैं, जिन्हें गोलियों से भुना जा सकता है।
पहलवी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि शासन अपने अंत से डरा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि खामेनेई इस संचार बंदी का उपयोग “युवा नायकों” की सामूहिक हत्या करने के लिए एक ढाल के रूप में करना चाहते हैं। रजा पहलवी ने राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले वादों को याद दिलाते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनियों ने अब तक शासन के “गुंडों” को कुछ हद तक पीछे रखा है। उन्होंने ट्रंप से आग्रह किया कि वे एक शांतिप्रिय और अपने वचन के पक्के नेता होने के नाते ईरान की साहसी जनता को सुरक्षा बलों द्वारा घेरे जाने और कुचले जाने से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।
दूसरी ओर, ईरान के भीतर से सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने के संकेत मिल रहे हैं। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने डोनाल्ड ट्रंप पर पलटवार करते हुए उन पर “ईरानियों के खून से सने हाथ” होने का संगीन आरोप लगाया है। खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी केवल अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही संपत्तियों और सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं। ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित दृश्यों में कट्टरपंथियों की भीड़ “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाती देखी गई, जो यह दर्शाता है कि शासन इस विरोध प्रदर्शन को एक विदेशी साजिश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
ईरान के सरकारी मीडिया ने अब प्रदर्शनकारियों के लिए “आतंकवादी” शब्द का उपयोग करना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह शब्दावली अक्सर उस समय इस्तेमाल की जाती है जब सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर हिंसक कार्रवाई या नरसंहार की तैयारी कर रहे होते हैं। खामेनेई ने दो टूक शब्दों में कहा कि अमेरिका को ईरान के मामलों में दखल देने के बजाय अपने देश की आंतरिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। वर्तमान में ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक तरफ जनता की अटूट हिम्मत है और दूसरी तरफ शासन का सख्त सैन्य पहरा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या व्हाइट हाउस रजा पहलवी की इस गुहार पर कोई ठोस प्रतिक्रिया देता है।
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