Iran-US Tension
Iran-US Tension : मध्य पूर्व में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच शांति की एक और कोशिश नाकाम होती दिख रही है। ईरान ने पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित 15-सूत्रीय शांति समझौते को आधिकारिक तौर पर ठुकरा दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि बिचौलियों के माध्यम से प्राप्त इस हालिया प्रस्ताव को तेहरान ने स्वीकार नहीं किया है। ईरान का तर्क है कि किसी भी प्रकार का युद्धविराम या समझौता केवल तभी संभव है, जब वह पूरी तरह से ईरान के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के अनुकूल हो। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और अधिक जटिल होता जा रहा है।
न्यूज एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा तैयार किया गया यह मसौदा ईरान और अमेरिका दोनों को भेजा गया था। इस शांति प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करने के लिए एक व्यावहारिक रास्ता खोजना था। प्रस्ताव में मुख्य रूप से 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) का सुझाव दिया गया था। साथ ही, वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को फिर से खोलने की शर्त भी शामिल थी। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि तेहरान ने अपनी स्थिति और कड़े नियम पहले ही मध्यस्थों के जरिए स्पष्ट कर दिए थे।
ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने तेहरान के सख्त रुख को दोहराते हुए कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव, प्रतिबंध या सैन्य धमकियों के आगे झुककर बातचीत की मेज पर नहीं आएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक तरफ हमले की डेडलाइन तय करना और दूसरी तरफ शांति की बात करना, दोनों प्रक्रियाएं एक साथ नहीं चल सकतीं। तेहरान का मानना है कि उसकी शर्तें उसके राष्ट्रीय स्वाभिमान पर आधारित हैं और इन्हें किसी भी हाल में कमजोर समझौते की ओर बढ़ते कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
बगाई ने अपने बयान में आगे कहा कि ईरान अपनी जायज मांगों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने में जरा भी संकोच नहीं करता है। उन्होंने इसे कमजोरी के बजाय ‘ईरान के आत्मविश्वास’ की झलक करार दिया। तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि उसने अमेरिका के लिए अपना आधिकारिक और कूटनीतिक जवाब तैयार कर लिया है। इस जवाब की घोषणा सही समय आने पर की जाएगी। ईरान की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा, न कि किसी थोपे गए प्रस्ताव के आधार पर।
इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है। पाकिस्तान के प्रस्ताव में इसे खोलने की बात कही गई थी, लेकिन ईरान इसे एक रणनीतिक हथियार के रूप में देख रहा है। ईरान का मानना है कि जब तक उसके राष्ट्रीय हितों की पूरी तरह रक्षा नहीं होती, तब तक वह इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करेगा। वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक खाई अभी और गहरी हो सकती है, जिससे वैश्विक बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
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