Iran Rejects US Deal
Iran Rejects US Deal : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15 बिंदुओं वाले सीजफायर (युद्धविराम) प्रस्ताव को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका का यह प्रस्ताव ‘जमीनी हकीकत से दूर और बढ़ा-चढ़ाकर’ पेश किया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह केवल अस्थायी शांति नहीं, बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहता है। न्यूज एजेंसी IRNA के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव के जवाब में अपना 10 सूत्रीय शांति एजेंडा पेश किया है, जिसमें क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए कई कड़ी शर्तें रखी गई हैं। इस कदम ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।
ईरान द्वारा पेश किए गए नए दस्तावेज़ में युद्ध खत्म करने के लिए व्यापक खाका तैयार किया गया है। इस योजना के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
स्थायी शांति: अस्थायी युद्धविराम के बजाय लड़ाई का पूर्ण और स्थायी अंत।
परमाणु अधिकार: परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत यूरेनियम संवर्धन के ईरान के अधिकार को वैश्विक मान्यता दी जाए।
प्रतिबंधों की समाप्ति: अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं।
लेबनान संकट: हिज़्बुल्लाह पर जारी इजरायली हमलों को तत्काल रोका जाए।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से नाकाबंदी हटाने को तैयार है, लेकिन इसके बदले में वह प्रत्येक गुजरने वाले जहाज से 20 लाख डॉलर का टैक्स लेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, यह राशि ओमान के साथ साझा की जाएगी और इसका उपयोग युद्ध में तबाह हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा।
ईरानी प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘अपर्याप्त’ करार दिया है। ट्रंप ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी कि यदि बुधवार आधी रात तक कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो अमेरिकी सेना ईरान को पूरी तरह तबाह कर देगी। ट्रंप ने कहा, “ईरान को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है और वह रात कल भी हो सकती है।” उन्होंने विस्तार से बताया कि अमेरिकी मिसाइलें ईरान के हर पुल, बिजली संयंत्र और महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाएंगी, जिससे वे दोबारा कभी इस्तेमाल के लायक नहीं बचेंगे।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वाशिंगटन ने अपना शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुँचाया था। हालांकि, ईरान ने इसे सिरे से नकारते हुए कुछ और कड़ी शर्तें भी जोड़ दी हैं। इनमें भविष्य में हमलों को रोकने की गारंटी, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और पश्चिम एशिया के सभी मोर्चों पर इजरायली सैन्य कार्रवाई बंद करना शामिल है। IRNA ने यह भी बताया कि यह कूटनीतिक खींचतान ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में अमेरिका का एक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन विफल रहा है, जिसके बाद ट्रंप ने अपनी समय सीमा (डेडलाइन) में थोड़ा बदलाव किया है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए मिडिल ईस्ट महायुद्ध की कगार पर खड़ा नजर आ रहा है। एक तरफ ईरान अपनी संप्रभुता और आर्थिक मुआवजे (शिपिंग टैक्स के रूप में) की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन सैन्य बल के जरिए तेहरान को झुकाने की कोशिश में है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टैक्स लगाने की ईरान की मांग वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें बुधवार की उस डेडलाइन पर टिकी हैं, जो क्षेत्र का भविष्य तय करेगी।
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