Middle East Crisis
Middle East Crisis: तेहरान से आई हालिया तस्वीरों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ईरान सरकार ने शुक्रवार को उन वीर नाविकों के ताबूतों की तस्वीरें सार्वजनिक कीं, जो अमेरिकी हमले के दौरान IRIS डेना युद्धपोत पर शहीद हो गए थे। भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन तस्वीरों को साझा करते हुए इसे अमेरिकी बलों द्वारा किया गया एक “आतंकवादी हमला” करार दिया। इन तस्वीरों में शहीदों के पार्थिव शरीरों को राजकीय सम्मान के साथ दिखाया गया है, जिसने ईरानी नागरिकों के बीच गम और गुस्से की लहर पैदा कर दी है। इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस घटना को इतिहास का एक काला अध्याय बताया।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका ने न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन किया है, बल्कि एक “युद्ध अपराध” को अंजाम दिया है। बकाएई के अनुसार, IRIS डेना को भारतीय नौसेना ने एक आधिकारिक अभ्यास और बंदरगाह यात्रा के लिए आमंत्रित किया था। शांतिपूर्ण मिशन पर निकले एक जहाज पर इस तरह का क्रूर हमला करना संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के तहत आक्रामकता की श्रेणी में आता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरानी राष्ट्र इस घृणित कृत्य को कभी न तो भूलेगा और न ही माफ करेगा।
ईरान ने अमेरिका पर एक और गंभीर आरोप लगाया है कि हमले के बाद अमेरिकी बलों ने जानबूझकर नाविकों के लिए चलाए जा रहे बचाव कार्यों में बाधा डाली। बकाएई ने अपने पोस्ट में लिखा कि घायल और डूबते हुए नाविकों की मदद करने से रोकना युद्ध के कानूनों का सबसे गंभीर उल्लंघन है। ईरान का मानना है कि अमेरिका की इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल उनके सैन्य गौरव को ठेस पहुँचाना था, बल्कि अधिकतम जनहानि सुनिश्चित करना भी था। यह घटना भारत और श्रीलंका के तटों के पास हुई, जो इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
घटनाक्रम के अनुसार, 4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 20 समुद्री मील दूर गाले के पास IRIS डेना युद्धपोत पर हमला हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक, एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो ने सीधे जहाज को निशाना बनाया, जिससे वह समुद्र की गहराइयों में समा गया। उस समय जहाज पर लगभग 180 नाविक सवार थे। इस भीषण हमले में 87 नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 नाविकों को श्रीलंका की नौसेना ने कड़ी मशक्कत के बाद बचा लिया। घायलों का इलाज वर्तमान में गाले के अस्पतालों में चल रहा है।
हमले की सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने एक सच्चे मित्र और जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति की भूमिका निभाई। श्रीलंका के नेतृत्व में चलाए जा रहे खोज एवं बचाव अभियान (SAR) में भारत ने तुरंत अपने संसाधन झोंक दिए। भारतीय नौसेना ने अपने जहाज INS तरंगिनी और INS इक्षक को मौके पर भेजा। इसके साथ ही, अत्याधुनिक P-8I समुद्री गश्ती विमानों को भी तैनात किया गया ताकि समुद्र की सतह और गहराई में जीवित बचे लोगों की तलाश की जा सके। भारत की इस त्वरित प्रतिक्रिया की कूटनीतिक हलकों में सराहना की जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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