West Asia Conflict
West Asia Conflict : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष को अब एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन शांति की गुंजाइश कम और बारूद की गंध बढ़ती जा रही है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में अब तेहरान ने बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने रविवार को एक ऐसा बयान जारी किया है जिसने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सीधे तौर पर विरोधी देशों के नीति-निर्धारकों के निजी गलियारों तक पहुँचेगा।
ईरान के संयुक्त सैन्य कमान के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फघरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि अमेरिका और इजरायल के सैन्य व राजनीतिक अधिकारियों के निजी आवास अब ईरान के लिए ‘वैध सैन्य लक्ष्य’ (Legitimate Targets) बन चुके हैं। जोल्फघरी का यह बयान उन अधिकारियों के लिए सीधी चेतावनी है जो वर्तमान में इजरायल या मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों में तैनात हैं। ईरान का तर्क है कि जब उनके नागरिकों के घरों को युद्ध में निशाना बनाया जा सकता है, तो हमलावर देशों के नेताओं के घर भी सुरक्षित नहीं रहने चाहिए।
प्रवक्ता जोल्फघरी ने अपने संबोधन में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यह निर्णय कोई आकस्मिक कदम नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने जानबूझकर ईरान के विभिन्न शहरों में निर्दोष नागरिकों के आवासीय क्षेत्रों और निजी घरों को निशाना बनाया है। जोल्फघरी के अनुसार, “ईरानी नागरिकों के खून और उनके उजड़े हुए घरों का हिसाब बराबर करने के लिए अब दुश्मन के रणनीतिकारों के ठिकानों को भी उसी तरह ध्वस्त किया जाएगा।” यह बयान युद्ध के नियमों में एक खतरनाक बदलाव का संकेत दे रहा है।
ईरान की धमकियां केवल बयानों तक सीमित नहीं हैं। तेहरान ने वाशिंगटन को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान की धरती पर जमीनी आक्रमण (Ground Invasion) करने की हिमाकत की, तो अमेरिकी सैनिकों को “आग के हवाले” कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस समय मिडिल ईस्ट में पिछले दो दशकों की सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य तैनाती देखी जा रही है। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना किसी भी स्तर के संघर्ष के लिए तैयार है और वह अमेरिकी सैनिकों के लिए इस क्षेत्र को कब्रिस्तान में बदल देगी।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वाशिंगटन की शांति वार्ता केवल एक दिखावा और कूटनीतिक प्रपंच है। उन्होंने कहा कि एक तरफ अमेरिका बातचीत की मेज सजाता है और दूसरी तरफ क्षेत्र में अतिरिक्त घातक हथियारों और सैनिकों की खेप भेज रहा है। इसी बीच, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पहली बार युद्ध के दायरे को बढ़ाते हुए शिक्षण संस्थानों को भी इसमें घसीट लिया है। IRGC ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और इजराइली विश्वविद्यालय अब उनके रडार पर हैं।
IRGC ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिका को 30 मार्च दोपहर 12 बजे तक का कड़ा समय (Ultimatum) दिया है। ईरान की मांग है कि अमेरिका आधिकारिक रूप से ईरानी विश्वविद्यालयों पर हो रहे हमलों की निंदा करे और इजरायल को इस तरह की कार्रवाई से रोके। यदि इस समय सीमा तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो ईरान शैक्षणिक संस्थानों को भी सैन्य लक्ष्य मानकर हमला कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह रुख युद्ध को एक नए और अनियंत्रित चरण में ले जा सकता है, जहाँ नागरिक और शैक्षणिक ढांचे भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर है। ईरान की यह नई रणनीति न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए चुनौती है, बल्कि पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है।
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