US Iran Talks Fail : पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच आयोजित उच्च-स्तरीय शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने से वैश्विक कूटनीति में खलबली मच गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस विफलता की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इस विफलता के तुरंत बाद ईरान की ‘इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) ने एक कड़ा बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर तनाव और पाबंदियों का जो दौर चल रहा था, वह भविष्य में भी जारी रहेगा।

होर्मुज पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण: वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराया खतरा
28 फरवरी को संघर्ष की शुरुआत के बाद से ही ईरान ने सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया की कुल कच्चा तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। वार्ता की विफलता के बाद अब यह स्पष्ट है कि स्थिति ‘जस की तस’ बनी रहेगी। IRGC के रुख से यह साफ हो गया है कि होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी जहाज को अब भी ईरान की अनुमति लेनी होगी। ईरान न केवल यहाँ अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है, बल्कि वह यहाँ से गुजरने वाले जहाजों से ‘टोल’ या ट्रांजिट शुल्क वसूलने की अपनी योजना पर भी अडिग है।
सीजफायर के बावजूद बंद रहेगा मार्ग: समझौते का उल्लंघन और लेबनान कनेक्शन
8 अप्रैल को जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बनी थी, तब उम्मीद जगी थी कि होर्मुज को खोल दिया जाएगा। ईरान शुरुआत में इसके लिए राजी भी हो गया था, लेकिन लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद उसने महज 10 मिनट के भीतर इस मार्ग को फिर से सील कर दिया। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, सीजफायर लागू होने के बावजूद इस मार्ग के खुलने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय शर्तों में स्पष्ट किया है कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण ही मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन (Power Balance) बनाए रखने का एकमात्र जरिया है।
फंसे रहेंगे व्यापारिक जहाज: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘बुरा सपना’
सीजफायर समझौते के दौरान यह तय हुआ था कि मानवीय आधार पर हर दिन 15 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन CNN की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वार्ता विफल होने का मतलब है कि जिन जहाजों की संख्या पर पहले सहमति बनी थी, वे भी अब वहां से नहीं गुजर पाएंगे। वर्तमान में सैकड़ों जहाज समुद्र के बीचों-बीच फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ईरान के एक सूत्र ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका उसकी सभी शर्तों को नहीं मानता, तब तक किसी भी साझा सहमति की उम्मीद करना व्यर्थ है।
ईरान की रणनीति: ‘कोई जल्दी नहीं’ और कड़ा सौदेबाजी का रुख
ईरान का मानना है कि अमेरिका इस वार्ता के जरिए अपनी ‘अत्यधिक’ मांगों को मनवाने की कोशिश कर रहा था, जिसे स्वीकार करना उसके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ था। सूत्रों का कहना है कि ईरान को किसी भी प्रकार की कोई जल्दी नहीं है और वह लंबे समय तक इस गतिरोध को झेलने के लिए तैयार है। होर्मुज स्ट्रेट को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना ईरान की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाना चाहता है। जब तक वाशिंगटन ईरान की शर्तों, विशेषकर परमाणु अधिकारों और संपत्तियों की रिहाई पर पीछे नहीं हटता, तब तक दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग पर संकट के बादल छंटने वाले नहीं हैं।
Read More : Kaththi on OTT: थलपति विजय की ‘कत्थी’ का ओटीटी पर जलवा, एक्शन और सस्पेंस का ऐसा कॉम्बो फिर नहीं मिलेगा!


















