Iran USA Tension
Iran USA Tension: मध्य पूर्व में युद्ध के बादल एक बार फिर गहराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। एक तरफ जहां वॉशिंगटन से तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति अपने कड़े रुख को और स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने तेहरान को एक सीधा संदेश भेजा है कि या तो वे समझौते की मेज पर आएं या फिर गंभीर परिणामों का सामना करने के लिए तैयार रहें। ट्रंप प्रशासन की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत मिलने के बाद क्षेत्र में सैन्य हलचल तेज हो गई है। अमेरिका का मानना है कि ईरान की गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता की रक्षा बता रहा है।
अमेरिकी धमकियों के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक का लोहा मनवाया है। ईरान ने अपनी चौथी पीढ़ी की सतह-से-सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल ‘खैबर’ का सफल परीक्षण किया है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी 2000 किलोमीटर की मारक क्षमता है, जो इसे पूरे मध्य पूर्व में एक अत्यंत खतरनाक हथियार बनाती है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इस मिसाइल को एक अत्यंत गुप्त स्थान से लॉन्च किया है, ताकि इसकी लॉन्चिंग तकनीक और स्थान को दुश्मनों की नजरों से दूर रखा जा सके।
मिसाइल परीक्षण के साथ-साथ ईरान ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जिनेवा में ओमान की मध्यस्थता में चल रही अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का उद्देश्य परमाणु हथियार विकसित करना नहीं है। राष्ट्रपति ने तर्क दिया कि चूंकि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगा रखा है, इसलिए देश इस दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एक धार्मिक नेता राजनेताओं की तरह झूठ नहीं बोलता, और उनके फतवे का पालन करना देश की नीति है।
ईरान और अमेरिका के बीच विवाद की जड़ में परमाणु कार्यक्रम ही रहा है। साल 2000 के दशक की शुरुआत में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक ‘फतवा’ जारी किया था, जिसमें परमाणु हथियारों के उत्पादन और उपयोग को इस्लाम के विरुद्ध बताते हुए प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगी देश हमेशा से इस दावे पर संदेह जताते रहे हैं। उनका आरोप है कि ईरान नागरिक परमाणु ऊर्जा की आड़ में चोरी-छिपे सैन्य क्षमता हासिल करना चाहता है। फिलहाल चल रही वार्ता का तीसरा दौर इन्हीं मतभेदों को मिटाने की एक कोशिश है।
यदि दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बनती है, तो शक्ति संतुलन को समझना बेहद जरूरी है। ईरान की मिसाइलें क्षेत्रीय स्तर पर बहुत बड़ी चुनौती पेश कर सकती हैं और इजरायल व अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। हालांकि, अमेरिका और इजरायल के पास दुनिया के सबसे उन्नत इंटरसेप्टर सिस्टम (जैसे आयरन डोम और पैट्रियट) हैं, जो ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिका की सैन्य शक्ति ईरान के मुकाबले कहीं अधिक विशाल और आधुनिक है, जिससे सीधे मुकाबले में ईरान के लिए राह आसान नहीं होगी।
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